वैश्विक

कोविड-19: यूएन का कामकाज जारी, ‘सेवा के लिए प्रतिबद्धता अटल’

विश्व भर में कोरोनावायरस - कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने अपने कर्मचारियों और दुनिया भर में इसके कार्यालयों का इस्तेमाल करने वालों की सुरक्षा के उपाय बढ़ा दिए हैं. इसके साथ ही ये भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि इस विश्व संगठन का अपरिहार्य कामकाज सामान्य रूप से जारी रहे और इसे मिला मैंडेट पूरा होता रहे और ज़रूरतमंदों को जीवनरक्षक सहायता भी मुहैया कराई जाती रहे.

कोविड-19: सावधानी व सहानुभूति

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कोरोनावायरस कोविड-19 के ख़िलाफ़ एकजुट जंग छेड़ने और एक दूसरे का ख़याल रखने की पुकार लगाई है. उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों की सलाह पर अमल करते हुए ऐहतियाती उपाय मुस्तैदी से करने का भी आहवान किया है. साथ ही इस स्वास्थ्य आपदा का मुक़ाबला करने में  एक दूसरे का ख़याल रखने का भी ज़रूरत पर ज़ोर दिया है.

कोविड-19 के ख़िलाफ़ जंग छेड़ने की पुकार, रखें एक दूसरे का ख़याल

संयक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने विश्व को भरोसा दिलाते हुए कहा है कि कोरोनावायरस यानी कोविड-19 अपने चरम पर पहुँचेगा और विश्व अर्थव्यवस्था मंदी से उबर जाएगी, मगर तब तक, “हम सभी को इस वायरस के संक्रमण की रफ़्तार को धीमा करने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा, और एक दूसरे का ख़याल रखना होगा.” उन्होंने कोविड-19 के संक्रमण के ख़िलाफ़ जंग छेड़ने का भी आहवान किया.

यूएन कर्मचारियों द्वारा यौन दुर्व्यवहार के पीड़ितों को ज़्यादा मदद की दरकार

संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों द्वारा यौन शोषण व दुर्व्यवहार का शिकार होने वाले पीड़ितों को मदद देने के लिए उठाए जाने वाले क़दम असरदार साबित हुए हैं लेकिन अभी और ज़्यादा प्रयास करने की ज़रूरत है. संयुक्त राष्ट्र में पीड़ितों के अधिकारों की पैरोकार जेन कॉनर्स ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में ऐसे मामलों की पड़ताल करने वाली एक ताज़ा रिपोर्ट के ख़ास बिन्दु पेश किए.

 

कोविड-19 के संक्रमण के बढ़ते मामलों का नया केंद्र बना योरोप

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि ‘विश्वव्यापी महामारी’ कोविड-19 ने अब योरोप को अपनी चपेट मे ले लिया है जहां अब किसी अन्य क्षेत्र के देशों की तुलना में सबसे ज़्यादा मामलों की पुष्टि हो रही है. इस महामारी से निपटने के प्रयासों के तहत यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने अन्य साझीदार संगठनों के साथ मिलकर एकजुटता फ़ंड शुरू किया है जिसमें लोगों व संगठनों का योगदान देना संभव हो सकेगा.

मानवाधिकार: 'नस्लभेद व नफ़रत भी संक्रामक हत्यारे हैं'

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि कोरोनावायरस ने बेशक लाखों लोगों के बीच कुछ दूरियाँ बनाए रखने के लिए मजबूर करते हुए उन्हें सामाजिक रूप से अलगाव की परिस्थितियों में भेज दिया है, मगर ये वायरस लोगों को नस्लभेद के ख़िलाफ़ लड़ाई में एकजुट होने से नहीं रोक सकता. 

कोविड-19 महामारी के बारे में पाँच अहम बातें

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोनावायरस (कोविड-19) को ‘विश्वव्यापी महामारी’ (Pandemic) परिभाषित किया है. कोरोनावायरस को ‘विश्वव्यापी महामारी’ की श्रेणी में रखे जाने के क्या मायने हैं और इस घोषणा से वायरस से निपटने के प्रयासों पर क्या असर पड़ेगा? कोविड-19 से जुड़े कुछ अहम सवालों के जवाब यहाँ देख सकते हैं.

कोरोनावायरस (कोविड-19) 'विश्वव्यापी महामारी' परिभाषित

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या में विश्व भर में लगातार बढ़ोत्तरी को देखते हुए कोविड-19 को 'विश्वव्यापी महामारी' परिभाषित कर दिया है. चीन के बाद हाल के दिनों में इटली, ईरान और कोरिया गणराज्य में बड़ी संख्या में संक्रमित मरीज़ों की पुष्टि हुई है और अन्य देशों में भी मामले सामने आ रहे हैं.  यूएन एजेंसी ने दोहराते हुए कहा है कि इस महामारी को क़ाबू में करना संभव है लेकिन इसके लिए देशों को पुरज़ोर प्रयास करने होंगे. 

जलवायु परिवर्तन से जंग स्कूली छात्रों के संग

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पर्यावरण से जुड़े हर पहलू पर व्यापक असर पड़ रहा है. इस विशालकाय चुनौती से निपटने में स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों की क्या भूमिका हो सकती है और वे किस तरह नए और अभिनव समाधानों का हिस्सा बन सकते हैं? संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की एक पहल इसी दिशा में प्रयासों पर केंद्रित है.

कोविड-19: यूएन मुख्यालय में ऐहतियाती उपाय, आम लोगों का प्रवेश बंद

कोरोनावायरस कोविड-19 का संक्रमण रोकने के प्रयासों के तहत दुनिया भर में अनेक स्कूल बंद कर दिए गए हैं और बड़ी संख्या में बच्चे स्कूलों से दूर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन - यूनेस्को ने मंगलवार को ये जानकारी देते हुए बताया कि दुनिया भर में लगभग 36 करोड़ 30 बच्चों की स्कूली शिक्षा बाधित हुई है.