वैश्विक

जलवायु मुद्दे पर एकल शुरूआत ने खोले बदलाव के विशाल दरवाज़े

अमेरिका की एक 18 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता सोफ़िया कियान्नी ने यूएन न्यूज़ के साथ बातचीत में कहा है वो पर्यावरण कोई रुचि नहीं रखने वाले हर व्यक्ति को जलवायु कार्यकर्ता के रूप में तब्दील कर देने की ख़्वाहिशमन्द हैं. सोफ़िया कियान्नी का परिवार मूलतः ईरान से है और वो ख़ुद उन सात युवाओं में शामिल हैं जिन्हें दुनिया भर से महासचिव एंतोनियो गुटेरेश पर्यावरण पर युवा सलाहकारों के समूह में शामिल किया गया है.

कोविड-19: वैक्सीन की तलाश में प्रगति, सटीक औज़ार अब भी उपलब्ध नहीं

वैश्विक महामारी कोविड-19 की रोकथाम के लिये अनेक प्रकार की वैक्सीन पर तेज़ी से काम आगे बढ़ रहा है लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है कि वैक्सीन के ज़रिये इस महामारी से बचाव के लिये फ़िलहाल कोई सटीक औज़ार उपलब्ध नहीं है और शायद भविष्य में भी ऐसा ना हो पाए. शुक्रवार को यूएन एजेंसी की आपात समिति की बैठक में सर्वमत से ये सहमति जताई गई थी कि कोविड-19 अब भी अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता वाली वैश्विक स्वास्थ्य आपदा है. 

कोविड-19 अब भी है अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता वाली वैश्विक स्वास्थ्य आपदा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की आपात समिति ने कोविड-19 महामारी के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई के लिये यूएन एजेंसी और साझीदार संगठनों की सराहना की है. साथ ही समिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब तक एक करोड़ 70 लाख लोगों को संक्रमित करने वाला और छह लाख 50 हज़ार से अधिक लोगों की मौत का कारण बनने वाला सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट अब भी एक अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति है जो फ़िलहाल ख़त्म होती नज़र नहीं आ रही है.

नवजात शिशुओं के लिए स्तनपान है सर्वोत्तम आहार

शनिवार, 1 अगस्त, को ‘विश्व स्तनपान सप्ताह’ की शुरुआत हुई है जिसके तहत विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने एक साझा अपील जारी करके स्तनपान से होने वाले फ़ायदों और उसके सही तरीक़ों से जुड़ी अहम जानकारी महिलाओं तक पहुंचाने के लिये परामर्श सेवाएँ सुनिश्चित किये जाने की पुकार लगाई है. यूएन एजेंसी के मुताबिक नवजात शिशुओं को जन्म के बाद पहले छह महीनों में सिर्फ़ स्तनपान कराना चाहिये और उसके बाद भी लगभग दो साल तक स्तनपान जारी रखने के प्रयास करने चाहिये.

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19: ‘सदी में एक बार आने वाला संकट’

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वैश्विक महामारी कोविड-19 को एक ऐसा स्वास्थ्य संकट क़रार दिया है जो सदी में एक ही बार आता है और जिसके प्रभाव आने वाले कई दशकों तक महसूस किये जाते रहेंगे. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की आपात समिति ने 30 जनवरी 2020 को कोविड-19 को अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा घोषित किये जाने की सिफ़ारिश की थी जिसके छह महीने पूरे होने पर शुक्रवार, 31 जुलाई, को समिति ने फिर बैठक कर मौजूदा हालात की समीक्षा की है. 

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की सलाह – ख़ुद को 'अपराजेय' ना समझें युवा

वैश्विक महामारी कोविड-19 संक्रमण से गम्भीर रूप से पीड़ित होने का ख़तरा वृद्धजनों को सबसे अधिक है लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने युवा पीढ़ी को आगाह किया है कि इस महामारी से उन्हें भी पूरी तरह सचेत रहना होगा. कोरोनावायरस संक्रमण के अब तक एक करोड़, 68 लाख से ज़्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है और छह लाख, 62 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हुई है. 

शान्तिपूर्ण सभा करने का अधिकार: मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पेश की नई व्याख्या

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति ने शान्तिपूर्ण ढँग से एकत्र होने के अधिकार की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया है कि यह दायरा व्यक्तिगत मौजूदगी वाली बैठकों के साथ-साथ वर्चुअल और ऑनलाइन सभाओं के लिये भी लागू होता है. मानवाधिकार समिति के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने कहा है कि लोगों को शान्तिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है और सरकारों को मानवाधिकार क़ानूनों का सम्मान करते हुए अपने तय दायित्वों का निर्वहन करना चाहिये. 

कोविड-19 है 'एक बड़ी लहर' जिसकी रफ़्तार रोकने की दरकार

संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी – विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंगलवार को कहा है कि कोविड-19 वायरस सम्भवतः साँस सम्बन्धी अन्य बीमारियों की तरह मौसम के बदलावों से प्रभावित नहीं होने वाला है. एजेंसी ने इन हालात के मद्देनज़र इस वायरस का फैलाव रोकने के लिये सामाजिक दूरी रखने के उपाय को ज़्यादा अहमियत देने का आहवान किया है. 

कोविड-19: शहरी जगत को नया आकार देने व मज़बूत बनाने की ज़रूरत

स्वास्थ्य प्रणालियों पर बढ़ते बोझ, अपर्याप्त जल उपलब्धता, स्वच्छता और अन्य चुनौतियों से जूझते शहरों के लिये विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 एक अभूतपूर्व संकट के रूप में उभरी है – महामारी के लगभग 90 फ़ीसदी मामले शहरी क्षेत्रों में ही दर्ज किये गए हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार को एक नया नीतिपत्र जारी करते हुए ध्यान दिलाया है कि बेहतर पुनर्बहाली के लिये शहरी जगत को नई सोच व नए आकार के साथ विकसित करना होगा. 

हेपेटाइटिस-बी: नौनिहालों में संक्रमण की दर हुई काफ़ी कम

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोमवार को कहा है कि दुनिया भर में पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में सम्भावित जानलेवा हेपेटाइटिस-बी की मौजूदगी वर्ष 2019 में कम हो कर एक प्रतिशत पर आ गई है. उससे पहले वर्ष 1980 से वर्ष 2000 के आरम्भिक दौर के दशक में ये आँकड़ा पाँच प्रतिशत था. उस दौर को हेपेटाइटिस-बी की वैक्सीन बनने से पहले का दौर कहा जाता है.