वैश्विक

पर्यटन को कार्बन मुक्त बनाने के लिए ज़्यादा सहयोग की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र के विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) ने  जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए परिवहन और पर्यटन क्षेत्रों के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया है. स्पेन के मैड्रिड शहर में 2019 संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (कॉप-25) के दौरान यूएन एजेंसी ने पर्यटन क्षेत्र के परिवहन स्रोतों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन के बारे में बुधवार को एक रिपोर्ट जारी की.

भूमिबद्ध देशों में ग़रीबी दूर करने के लिए साझेदारी हो

भूमिबद्ध यानी चारों ओर भूमि से घिरे देशों की गिनती विश्व के निर्धनतम देशों में होती है और उन्हें आर्थिक विकास की प्रक्रिया में बहुत से अवरोधों का सामना करना पड़ता है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि असरदार साझेदारियों के ज़रिए इन देशों को ग़रीबी से उबारा जा सकता है.

'सुरक्षित भविष्य के लिए रोकना होगा मिट्टी का क्षरण'

पृध्वी पर टिकाऊ जीवन और मानव कल्याण के लिए मिट्टी का स्वस्थ होना बेहद अहम है लेकिन विश्व के सभी महाद्वीपों पर मृदा क्षरण होने से खाद्य व जल सुरक्षा और जीवन की कई बुनियादी ज़रूरतों पर ख़तरा बढ़ रहा है. इस वर्ष ‘विश्व मृदा दिवस’ के अवसर पर मिट्टी के क्षरण को रोकने और भविष्य में उसे फिर से स्वस्थ बनाने के प्रति जागरूकता के प्रसार पर ज़ोर दिया जा रहा है.

क्या दुनिया कोयला युग समाप्त करने के लिए तैयार है?

बिजली की सर्व उपलब्धता ने दुनिया बदल दी है, इससे देशों की अर्थव्यवस्थाएं विकसित हुईं हैं और लाखों लोग ग़रीबी के चंगुल से बाहर निकले हैं. हालांकि इस सफलता की एक बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ी है - जीवाश्म ईंधन पर बहुत अधिक निर्भर ऊर्जा क्षेत्र वैश्विक कार्बन डायऑक्साइड उत्सर्जन के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से  के लिए ज़िम्मेदार है. ये उन ग्रीनहाउस गैसों में से एक है जो वायुमंडल में गर्मी को क़ैद करके पृथ्वी को गर्म करती हैं - और इसका लगभग दो - तिहाई उत्सर्जन कोयले से आता है.

2020 में सहायता के ज़रूरतमंदों की होगी रिकॉर्ड संख्या

संयुक्त राष्ट्र की आपदा राहत एजेंसी के प्रमुख ने कहा है कि वर्ष 2020 में दुनिया भर में लगभग 16 करोड़ 80 लाख लोगों को मदद की ज़रूरत होगी और ये लोग 50 से भी अधिक देशों में मौजूद होंगे. एजेंसी के प्रमुख मार्क लोकॉक ने इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मदद ज़रूरतों को पूरा करने के लिए 29 अरब डॉलर की मानवीय सहायता रक़म जुटाने का आहवान किया है.

जलवायु संकट: मानव स्वास्थ्य पर गंभीर असर, समुचित तैयारी की कमी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि चरम मौसम की घटनाओं – लू, चक्रवाती तूफ़ानों, बाढ़, सूखा – से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर का ख़तरा लगातार बढ़ रहा है लेकिन इसके बावजूद अधिकतर देश इस दिशा में अभी पर्याप्त स्तर पर प्रयास नहीं कर रहे हैं. वहीं यूएन की मौसम विज्ञान एजेंसी (WMO) ने कहा है कि वर्ष 2019 में समाप्त होने वाला दशक अब तक का सबसे गर्म दशक साबित होने की संभावना है. 

विकलांगता सम्बन्धी अधिकारों पर नेतृत्व के लिए तैयार है यूएन

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि विकलांग व्यक्तियों के अधिकार सुनिश्चित करने के विषय पर यूएन उदाहरण पेश करते हुए नेतृत्व करने के लिए तैयार है. यूएन प्रमुख ने मंगलवार, 3 दिसंबर, को 'विकलांग व्यक्तियों के अंतरराष्ट्रीय दिवस' पर अपने संदेश में कहा है कि विकलांग व्यक्तियों के मानवाधिकारों की रक्षा करना टिकाऊ विकास लक्ष्यों के नज़रिए से भी महत्वपूर्ण है.

2019 जलवायु सम्मेलन: कॉप-25 बैठक की पांच महत्वपूर्ण बातें

जलवायु परिवर्तन तेज़ रफ़्तार से हो रहा है – औद्योगिक क्रांति के बाद पृथ्वी का औसत तापमान 1.1 डिग्री बढ़ चुका है जिसका लोगों के जीवन पर व्यापक असर हुआ है, और अगर मौजूदा रुझान इसी तरह से जारी रहे तो इस सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी 3.4 से 3.9 डिग्री सेल्सियस तक हो सकती है. मानवता के लिए इसके विनाशकारी नतीजे होंगे. स्पेन के मैड्रिड शहर में 2 दिसंबर से शुरू हुए वार्षिक यूएन जलवायु सम्मेलन (कॉप-25) से ठीक पहले यह चेतावनी जारी की गई है.

आधुनिक दासता को सभी रूपों में ख़त्म करने की सख़्त ज़रूरत

दासता अतीत की बात नहीं है, बल्कि ये आज भी दुनिया भर में कई रूपों में मौजूद है. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का कहना है कि दुनिया भर में लगभग 4 करोड़ लोग आज भी आधुनिक दासता के चंगुल में फँसे हुए हैं.

जलवायु सम्मेलन: हरित अर्थव्यवस्था को आगे बढ़कर अपनाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि हरित अर्थव्यवस्था से डरने के बजाय उसे खुलकर अपनाया जाना चाहिए. यूएन प्रमुख ने सोमवार को स्पेन की राजधानी मैड्रिड में वार्षिक यूएन जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP25) के पहले दिन प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए दोहराया कि महत्वाकांक्षी जलवायु कार्रवाई के लिए मज़बूत राजनैतिक इच्छाशक्ति दर्शाए जाने के साथ-साथ कार्बन की क़ीमत तय किए जाने की ज़रूरत है.