वैश्विक

भ्रष्टाचार: फ़ौलादी इरादों और असरदार कार्रवाई की दरकार

एक ऐसे समय जब टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए दुनिया ‘कार्रवाई के दशक’ की ओर क़दम बढ़ाने के लिए तैयार है, सोमवार को आबूधाबी में आयोजित भ्रष्टाचार-विरोधी सम्मेलन में इस समस्या से निपटने के लिए सभी देशों से एकजुट होने का आग्रह किया गया है ताकि महत्वपूर्ण संसाधनों को धन के ग़ैरक़ानूनी लेनदेन में नष्ट होने से रोका जा सके.

रैफ़्यूजी फ़ोरम: शरणार्थियों व मेज़बान देशों के लिए निडर व नवीन उपायों पर ज़ोर

विश्व में शरणार्थियों की संख्या दो करोड़ 60 लाख के आंकड़े पर पहुंच गई है और इस चुनौती की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ राजनयिक, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज की बड़ी हस्तियां सोमवार को जिनीवा में शुरू हुए विश्व शरणार्थी फ़ोरम (Global Refugee Forum) में हिस्सा ले रहे हैं. पहली बार आयोजित हो रही इस बैठक के ज़रिए शरणार्थियों व उन्हें शरण देने वाले समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधानों की तलाश करने पर विचार-विमर्श होगा. 

अरबों बच्चे और व्यस्क - कम पोषण और मोटापे की चपेट में

निम्न और मध्यम आय वाले देशों में से हर तीन में से एक देश में कुपोषण की दो चरम सीमाएँ स्वास्थ्य के लिए गंभीर ख़तरा पैदा कर रही हैं. ये हैं – कम पोषण और मोटापा. संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी – विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तेज़ी से बदलती खाद्य व्यवस्थाओं से निपटने के लिए नए तरीक़े अपनाने पर ज़ोर दिया है.  

कॉप-25: वार्ताओं में प्रगति, जलवायु महत्वाकांक्षाओं पर निराशा

कॉप-25 में चल रही वार्ताएं अंततः रविवार को समाप्त हो गईं. इनमें निजी क्षेत्र के साथ-साथ राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय सरकारों के स्तर पर ख़ासी प्रगति हुई है. अलबत्ता, जलवायु कार्रवाई के लिए महत्वाकाँक्षाएँ बढ़ाने के मुद्दे पर कोई आम सहमति नहीं हो सकी जिस पर बड़े पैमाने पर निराशा का माहौल भी देखा गया.

कॉप-25: महत्वाकांक्षा भरा संदेश देने की पुकार

स्पेन के मैड्रिड शहर में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (कॉप-25) के अंतिम दिन शुक्रवार को देशों के प्रतिनिधिमंडल देर रात तक पारस्परिक सहमति को अंतिम रूप देने के प्रयासों मे जुटे थे. यूएन प्रमुख ने अपने संदेश में सभी देशों से ज़्यादा महत्वाकांक्षी होने और विज्ञान पर आधारित मज़बूत कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है.

हरित भविष्य के लिए कायापलट कर देने वाले बदलाव लाने होंगे

ऐसे में जबकि विश्व में गहराते जलवायु संकट से करोड़ों लोगों का रोज़गार प्रभावित हो रहा है, तो भविष्य में लोगों की आजीविका के साधनों को सुरक्षित रख पाना इस तरह के कायापलट कर देने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा कि हम किस तरह पृथ्वी पर ऊर्जा कैसे हासिल करते हैं और अपने संसाधनों का प्रबंधन किस तरह करते हैं.

तीसरी कमेटी: मानवाधिकार संरक्षण की ज़िम्मेदारी

मादक पदार्थों पर नियंत्रण से लेकर, इंडीजिनस यानी आदिवासी लोगों के अधिकारों और आतंकवाद निरोधक उपायों तक, इन सभी हालात में मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी है - संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति पर. तीसरी समिति को सामाजिक, मानवीय सहायता और सांस्कृतिक मामलों की समिति भी कहा जाता है. इसके सामने जटिल समस्याओं और चुनौतियों की एक लंबी सूची है जिन पर ये समिति नीतियाँ व कार्यक्रम बनाती है.  हर साल सितंबर में जब विश्व नेता यूएन मुख्यालय में एकत्र होते हैं तो उनके विचारों और संकल्पों को हक़ीक़त में बदलने के लिए क्या-क्या किया जाता है, इस बारे में हमारी श्रंखला की अगली कड़ी में प्रस्तुत है महासभा की तीसरी समिति के बारे में... 

'सर्वजन के लिए-सर्वत्र स्वास्थ्य देखभाल' का वादा पूरा हो

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ‘अंतरराष्ट्रीय सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज दिवस’ पर अपने संदेश में विश्व नेताओं से ‘सर्वजन के लिए, सर्वत्र स्वास्थ्य देखभाल' के वादे को पूरा करने का आग्रह किया है. सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवेरज पर सितंबर 2019 में यूएन महासभा के वार्षिक सत्र के दौरान एक उच्चस्तरीय बैठक में यह संकल्प लिया गया था.  

पहाड़ों का महत्व, ख़ासकर युवाओं के लिए!

पृथ्वी के लगभग 27 प्रतिशत हिस्से पर पहाड़ विराजमान हैं और ये भी ध्यान देने की बात है कि ये पहाड़ एक टिकाऊ आर्थिक विकास की तरफ़ दुनिया की बढ़त में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं. भविष्य को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2019 के अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस पर युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया गया है. बुधवार, 11 दिसंबर को मनाए गए इस दिवस के मौक़े पर इस वर्ष की थीम रखी गई है - Mountains matter for Youth.

हर चौथा बच्चा अब भी 'अदृश्य', मगर क्यों!

पिछले एक दशक में विश्व में ऐसे बच्चों के अनुपात में 20 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है जिनके जन्म का आधिकारिक पंजीकरण किया जाता है, इसके बावजूद पांच साल से कम उम्र के 16 करोड़ से ज़्यादा बच्चों यानी हर चार में से एक बच्चे का पंजीकरण अब भी नहीं हुआ है. अपनी स्थापना के 73 वर्ष पूरे होने पर संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है.