वैश्विक

खुले में शौच से गरिमा और जीवन पर मंडराता है ख़तरा

शौच के बाद और भोजन करने से पहले साबुन से हाथ नहीं धोने जैसी स्वच्छता और साफ़-सफ़ाई की आदतें न होने से सालाना 8 लाख से ज़्यादा लोग मौत का शिकार हो जाते हैं – जोकि मलेरिया से होने वाली मौतों की संख्या  से भी अधिक है. खुले में शौच करना मनुष्य की गरिमा, स्वास्थ्य और कल्याण का अपमान है – ख़ासतौर पर लड़कियों और महिलाओं का.

सड़क सुरक्षा: विशालकाय मगर अदृश्य बन चुके संकट से निबटने की पुकार

सड़कों पर यातायात सुरक्षा में बेहतरी करके लोगों की ज़िंदगियाँ बचाना भी 2030 के टिकाऊ विकास एजेंडा में एक लक्ष्य के रूप में शामिल है. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए लोगों की याद में मनाए जाने वाले दिवस के मौक़े पर जारी अपने संदेश मे ये बात कही है. ये दिवस नवंबर के तीसरे रविवार को मनाया जाता है और 2019 में ये 17 नवंबर को मनाया गया.

'विविधता एक संपदा है, नाकि विभाजन की वजह'

एक ऐसे दौर में जब चरमपंथ और कट्टरता के मामले ज़्यादा दिखाई दे रहे हैं, जब “नफ़रता का विष” मानवता के एक हिस्से में ज़हर घोल रहा है, उस समय में सहिष्णुता की भूमिका बेहद आवश्यक हो गई है. संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था - यूनेस्को की प्रमुख ने ‘अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस’ पर जारी अपने संदेश में यह बात कही है.

सस्ता इंसुलिन मिलेगा आसानी से, मरीज़ों की होगी बड़ी मदद

डायबिटीज़  यानी मधुमेह बीमारी को नियंत्रण में रखने के लिए ज़रूरी इंसुलिन की महंगी क़ीमत अब गुज़रे ज़माने की बात हो सकती है जिससे लाखों-करोड़ों मरीज़ों के जीवन में नया बदलाव लाने और इलाज में मदद मिलने की संभावना है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक नई योजना शुरू की है जिसके ज़रिए विश्व भर में सस्ते इंसुलिन का उत्पादन बढ़ाया जाएगा.

इंटरव्यू: ग़रीबी मिटाने के तरीक़ों पर नोबेल सह-विजेता प्रोफ़ेसर अभिजीत बैनर्जी

वर्ष 2019 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार तीन विद्वानों – एस्थर डफ़लो, अभिजीत बैनर्जी और माइकल क्रेमर - को दिया गया है.  डॉक्टर अभिजीत बैनर्जी अमेरिका के एमआईटी संस्थान में अर्धशास्त्र के प्रोफ़ेसर हैं और अनेक देशों में ऐसे प्रयोगों का हिस्सा रहे हैं जिनके तहत ग़रीब लोगों को कुछ प्रशिक्षण देकर हालात सुधारने का मौक़ा दिया जाता है. पेश है सह-विजेता प्रोफ़ेसर अभिजीत बैनर्जी के साथ यूएन हिन्दी न्यूज़ के प्रमुख महबूब ख़ान की एक ख़ास बातचीत.

किसी भी अन्य बीमारी की तुलना में न्यूमोनिया है सबसे ज़्यादा घातक

न्यूमोनिया एक ऐसी बीमारी है जिसकी आसानी से रोकथाम की जा सकती है. इसके बावजूद विश्व में किसी अन्य बीमारी की तुलना में बच्चों की सबसे ज़्यादा मौतें इसी बीमारी से हो रही हैं – हर 39 सेकेंड में एक मौत. संयुक्त राष्ट्र और साझेदार संगठनों ने मंगलवार को ‘विश्व न्यूमोनिया दिवस’ पर चेतावनी जारी की है कि इन सर्वविदित तथ्यों के बावजूद बच्चों के जीवन की रक्षा के लिए पर्याप्त धनराशि का अभाव है.

बहुपक्षवाद को 'मौजूदा व भविष्य की चुनौतियों' से लड़ना होगा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है दुनिया में चुनौतियों का स्वरूप बदल रहा है और नए संकट उभर रहे हैं. ऐसी स्थिति में बहुपक्षवादी व्यवस्था की सफलता के लिए यह ज़रूरी है कि उसमें मौजूदा चुनौतियों के अनुरूप बदलाव किए जाएं. 1918 में पहले विश्व युद्ध की समाप्ति की स्मृति में विश्व भर में समारोह आयोजित हो रहे हैं और इसी सिलसिले में महासचिव ने सोमवार को ‘पेरिस पीस फ़ोरम’ को संबोधित किया. 

यूएन विशेषज्ञ:अदम्य साहस के साथ वैश्विक मानवाधिकारों के लिए संघर्षरत

निडर. स्पष्टवादी. आलोचनात्मक. साहसिक. ना हिचकने वाले. अन्यायी. पक्षपाती. जोड़-तोड़ करने वाले. ये कुछ ऐसे विशेषण हैं जो मानवाधिकार परिषद के उन विशेषज्ञों का वर्णन करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं जो दुनिया भर में तमाम तरह के मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों पर शोध करते हैं, जानकारी एकत्र करते हैं और बहस-मुबाहिसा आयोजित करते हैं. 

यूएन का नया वन प्रोजेक्ट जलवायु संकल्पों को पूरा करने में देशों की मदद करेगा

संयुक्त राष्ट्र ने बेहतर वन प्रबंधन पर एक ऐसा नया प्रोजेक्ट तैयार किया है जिसकी मदद से एशिया, अफ्रीका और लातीनी अमेरिका के देशों में जलवायु परिवर्तन का सामना करने में मदद मिलेगी. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफ़एओ) ने ये योजना तैयार की है जिसे सोमवार को जारी किया गया.

बेसहारा इटली पहुंचने वाले 60 हज़ार युवाओं को सहारे की दरकार

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने एक नई रिपोर्ट में उन बच्चों की ज़रूरतों को रेखांकित किया है जिन्होंने अकेले या अपने परिजनों से बिछुड़ कर ख़तरनाक रास्तों के ज़रिए इटली तक की यात्रा की है. रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 से 2018 के बीच 60 हज़ार बच्चे इटली पहुंचे जिनमें 90 फ़ीसदी से ज़्यादा की उम्र 15 से 17 वर्ष तक थी लेकिन किशोरावस्था से बालिग़ होने के चरण में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.