वैश्विक

एक करोड़ से ज़्यादा बच्चों को नहीं मिल पाएगा स्कूल

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक संगठन (यूनेस्को) ने शुक्रवार को नए आंकड़े जारी किए हैं जो दर्शाते हैं कि तत्काल कार्रवाई के अभाव में लगभग एक करोड़ 20 लाख बच्चे कभी स्कूल नहीं जा पाएंगे. लड़कियों को शिक्षा के क्षेत्र में सबसे ज़्यादा बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है.

भूमि की उर्वरता बहाल करने की योजना पर सहमति

मरुस्थलीकरण रोकने और भूमि को फिर से उपजाऊ बनाने के प्रयासों को मज़बूती देने के इरादे से कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज़ यानी कॉप-14 सम्मेलन में ठोस कार्रवाई की पहल की गई है. सम्मेलन के अंतिम दिन शुक्रवार को ‘दिल्ली घोषणापत्र’ जारी किया गया जिसके तहत वर्ष 2030 तक ‘लैंड डिग्रेडेशन न्यूट्रैलिटी’ हासिल करना यानी भूमि क्षय के स्तर को स्थिर रखना अब देशों की राष्ट्रीय कार्ययोजनाओं में शामिल होगा.

दक्षिण-दक्षिण सहयोग से टिकाऊ विकास को मिलेगा बढ़ावा

विकासशील देशों के बीच सहयोग को एक ऐसा अनूठा रास्ता बताया गया है जिसके ज़रिए 2030 एजेंडा में निर्धारित टिकाऊ विकास लक्ष्यों की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ा जा सकता है. 12 सितंबर को दक्षिण-दक्षिण सहयोग के संयुक्त राष्ट्र दिवस पर आयोजित एक समारोह में विकासशील देशों में पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक नया प्लैटफ़ॉर्म शुरू किया गया है.

धार्मिक स्थलों की पवित्रता और सुरक्षा क़ायम रखने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र अलायंस ऑफ़ सिविलाइज़ेशंस (UNAOC) ने धार्मिक स्थलों की शुचिता और उपासकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुरूवार को एक नई कार्ययोजना पेश की है. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस अवसर पर कहा कि इसके ज़रिए विश्व भर में सहिष्णुता और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को बढ़ावा दिया जाएगा.  उन्होंने ज़ोर देकर कहा है कि उपासना स्थलों को चिंतन और शांति के लिए सुरक्षित पनाहगाह होना चाहिए, ना कि ख़ूनख़राबे और आतंक के घटनास्थल.

टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर प्रगति के लिए दिशा में बदलाव पर ज़ोर

संयुक्त राष्ट्र द्वारा नियुक्त स्वतंत्र विशेषज्ञों ने अपनी एक रिपोर्ट में रेखांकित किया है कि वैश्विक विकास का मौजूदा मॉडल अगर आगे भी जारी रहा तो इससे दशकों में हासिल की गई प्रगति ख़तरे में पड़ सकती है. रिपोर्ट के अनुसार लोगों और प्रकृति के बीच रिश्ते में बुनियादी और त्वरित बदलाव  लाकर मानव कल्याण को हासिल किया जा सकता है और ग़रीबी का उन्मूलन भी संभव है. संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग (UNDESA) द्वारा जारी यह रिपोर्ट टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर इस महीने होने वाली बैठक में चर्चा के केंद्र में रहेगी.

जलवायु संकल्पों को पूरा करने के कितने पास है दुनिया?

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सितंबर में होने वाली जलवायु शिखर वार्ता की तैयारी ज़ोरों पर है जिसे हाल के दशको में होने वाले सबसे बड़े जलवायु सम्मेलनों में माना जा रहा है. जलवायु आपात स्थिति और उससे उपजती चुनौतियों के बीच इस संकट से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर कार्रवाई भी की जा रही है, लेकिन क्या मौजूदा कार्रवाई पर्याप्त है?

चार करोड़ लोग दासता के दंश का शिकार

संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ उर्मिला भूला ने जिनीवा में मानवाधिकार परिषद में सोमवार को आगाह किया कि दासता के आधुनिक स्वरूप के मामलों के आने वाले दिनों में बढ़ने की संभावना है. इस संबंध में परिषद को एक रिपोर्ट सौंपते हुए उन्होंने कहा कि कामकाज के क्षेत्र में आ रहे बदलावों और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के परिणामस्वरूप ऐसा होगा.

महासभा का 74वां सत्र

संयुक्त राष्ट्र महासभा हर साल वार्षिक सत्र के लिए एकत्र होती है जिसमें देशों के प्रतिनिधि अपनी-अपनी बात बाक़ी प्रतिनिधियों के सामने रखते हैं. हर देश के प्रतिनिधि को बिना किसी बाधा के अपनी बात रखने का मौक़ा मिलता है. यही वो जगह है जहाँ इतिहास बनता है.

बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए वैश्विक कार्रवाई की पुकार

भारत की राजधानी नई दिल्ली में कॉन्फ्रेंस ऑफ़ पार्टीज़ यानी कॉप-14 में सोमवार को उच्च-स्तरीय खंड का आयोजन हुआ जिसमें भूमि के मरुसस्थलीकरण से बचाकर उसे उपजाऊ बनाने के उपाय करने में तेज़ी लाने का आहवान किया गया.

हर 40 सेकंड में एक आत्महत्या, अब भी!

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि देशों में राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सुधारों में प्रगति होने के बावजूद हर 40 सेकंड में आत्महत्या से एक व्यक्ति की मौत हो जाती है. संगठन के निदेशक ने दुनिया भर में आत्महत्याओं के अनुमानों के बारे में सोमवार को एक नई रिपोर्ट जारी करते हुए ये बात कही.