वैश्विक

प्रकृति और मानवता के बीच तालमेल के हालात बनाने होंगे - महासचिव

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दुनिया में मानवता और प्रकृति के बीच समरसता क़ायम करने के लिए ज़रूरी परिस्थितियों के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया गया है. जापान के ओसाका शहर में शनिवार, 29 जून को चीन और फ़्रांस के विदेश के मंत्रियों के साथ बैठक के बाद यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने आहवान किया. 

जी-20: ठोस जलवायु कार्रवाई और आर्थिक सहयोग की अपील

जापान के ओसाका शहर में ग्रुप-20 (जी-20) समूह के नेताओं की वार्षिक शिखर वार्ता शुक्रवार को शुरू हो गई. जी-20 दुनिया की सबसे बड़ी और तेज़ी से बढती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि यह बैठक बड़े राजनैतिक तनाव के परिदृश्य में हो रही है.

‘सैन फ्रांसिस्को की भावना फिर से जगानी होगी'

मानवाधिकारों के लिए फिर से भरोसा जगाना, सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना और "युद्ध के संकट" से दुनिया को बचाना – ये सभी संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सिद्धांतों में से हैं जो संगठन की आधारशिला यानी उसके चार्टर में दिखाई देते हैं जिस पर ठीक 74 साल पहले सैन फ्रांसिस्को में हस्ताक्षर किए गए थे.

यातना पर हर हाल में प्रतिबंध ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहा कि निसंदेह यातना पर हर हाल में रोक लगनी ज़रूरी है, मगर फिर भी दिन-ब-दिन इस मूल सिद्धांत का उल्लंघन होता देखा जा सकता है - ख़ासतौर पर बंदीगृहों, जेलों, पुलिस थानों, मनोरोग संस्थानों और दूसरे ऐसे स्थानों पर जहाँ क़ैद करने वाले लोग, बंदियों पर अत्याचार करने की हैसियत रखते हों.

आंखों की संक्रामक बीमारी ट्रेकोमा पर क़ाबू पाने में बड़ी सफलता

विश्व स्तर पर दृष्टिहीनता का प्रमुख कारण ट्रेकोमा संक्रमण का जोखिम झेल रहे लोगों की संख्या में 17 वर्षों में 91 फ़ीसदी की गिरावट हुई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 2002 में 1.5 अरब लोग ट्रेकोमा संक्रमण के ख़तरे का सामना कर रहे थे लेकिन 2019 में यह संख्या घटकर 14 करोड़ पर आ गई है. 

नफ़रत की सूनामी से तत्काल निपटना होगा: यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने नफ़रत और असहिष्णुता को एक ऐसा दैत्य बताया है जिसके कई सिर हैं और जिसमें से नफ़रत और हिंसा भरी सूनामी लहरें उफ़ान पर हैं. डिजिटल माध्यमों पर कट्टरता और नफ़रत के प्रसार पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इससे लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक स्थिरता को ख़तरा पैदा हो रहा है.

निगरानी / सर्वेलेंस तकनीक पर प्रतिबंध लगाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र द्वारा नियुक्त एक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कहा है कि जब तक निगरानी तकनीकों यानी सर्वेलेंस टैक्नोलॉजी के हानिकारक प्रभावों को कम करने के लिए "प्रभावी" राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण नियम न बन जाएँ, तब तक निगरानी तकनीकों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए.

ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल से बढ़ती समस्याएं

मादक दवाओं के इस्तेमाल से स्वास्थ्य पर पड़ने वाला प्रतिकूल असर अनुमान से कहीं ज़्यादा गंभीर और व्यापक है. मादक पदार्थों और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र राष्ट्र कार्यालय (UNODC) की नई रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है. रिपोर्ट दर्शाती है कि विश्व में मादक दवाओं और पदार्थों के इस्तेमाल से होने वाली समस्याओं से साढ़े तीन करोड़ लोग पीड़ित हैं लेकिन हर सात में से एक पीड़ित का ही उपचार हो पाता है.

दुनिया के सामने ‘जलवायु रंगभेद’ का ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि जलवायु से जुड़े रंगभेद का एक ऐसा नया दौर शुरू होने का ख़तरा नज़र आ रहा है जहाँ बढ़ते तापमान और भूख से बचने के लिए अमीर लोग धन के बल पर अपने लिए बेहतरी का रास्ता बना लेंगे. उनका मानना है कि पिछले 50 वर्षों में जितना भी विकास हुआ, वैश्विक स्वास्थ्य में बेहतरी आई है और ग़रीबी कम करने के प्रयास हुए हैं, जलवायु परिवर्तन की वजह से वे सभी विफल हो सकते हैं. 

महिलाओं की स्थिति: परिवारों में ही है बदलाव की बुनियाद

महिलाओं की अधिकारों की स्थिति में हाल के दशकों के दौरान अलबत्ता काफ़ी सुधार देखा गया है लेकिन पुरुषों और महिलाओं के बीच असमानता (लिंग भेद) और परिवारो में ही महिलाओं के अन्य बुनियादी अधिकारों के उल्लंघन के गंभीर मामले अब भी सामने आते हैं.