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कोरोनावायरस: संक्रमण रोकने के लिए शीर्ष वैज्ञानिकों की बैठक

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि कोरोनावायरस संक्रमण से होने वाली मौतों की संख्या एक हज़ार से ज़्यादा हो गई है. मंगलवार को जिनीवा में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक बैठक 'रीसर्च एंड इनोवेशन फ़ोरम'  शुरू हुई है जिसमें इस महामारी को फैलने से रोकने के रास्तों पर विचार विमर्श हुआ. अब इस बीमारी को आधिकारिक नाम COVID-19 दिया गया है और इसके लिए वैक्सीन अगले 18 महीनों में तैयार होने की संभावना जताई गई है.

विज्ञान में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने व लैंगिक खाई पाटने की पुकार

विश्व में वैज्ञानिक शोधकर्ताओं की कुल संख्या में महिलाएँ 30 फ़ीसदी से भी कम हैं जो दर्शाता है कि वैज्ञानिक जगत में महिलाओं व लड़कियों के लिए हालात में अब भी असमानता क़ायम है. विज्ञान से जुड़े क्षेत्रों में शिक्षा व रोज़गार के लिए महिलाओं व लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से मंगलवार को 'विज्ञान में महिलाओं व लड़कियों के अंतरराष्ट्रीय दिवस' पर प्रोत्साहन दिया जा रहा है.

कोरोनावायरस पर 'जल्द से जल्द क़ाबू पाना ज़रूरी'

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रोस एडेहनॉम घेबरेयेसस ने सोमवार को एक अपील जारी कर कहा है कि सरकारों द्वारा कोरोनावायरस के फैलाव को सीमित रखने के प्रयास प्राथमिकता के तौर पर जारी रहने चाहिए. चीन के वूहान शहर में पहली बार 31 दिसंबर 2019 को इस वायरस के संक्रमण का पता चला था और अब तक चीन सहित अन्य देशों में इसके संक्रमण के 40 हज़ार से ज़्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 900 से अधिक लोगों की मौत हुई है.

'विश्व नगरीय मंच' में भविष्य के शहरों पर चर्चा

शहरों के भविष्य पर चर्चा के लिए संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी आबू धाबी में शनिवार को ‘विश्व नगरीय मंच’ की शुरुआत हुई है जिसमें टिकाऊ व समावेशी शहरों के निर्माण में युवाओं, महिलाओं, ज़मीनी समुदायों, स्थानीय व क्षेत्रीय सरकारों और व्यवसायों की भूमिका पर विचार-विमर्श होगा. छह दिनों तक चलने वाली यह बैठक पहली बार अरब क्षेत्र में आयोजित की गई है. 

कोरोनावायरस: फ़ेस मास्क व अन्य एहतियाती सामग्री की मांग में आसमानी उछाल

चीन के अलावा अन्य देशों में कोरोनावायरस से संक्रमित मरीज़ों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ  फ़ेस मास्क सहित अन्य एहतियाती सामग्री की मांग में भारी इज़ाफ़ा हुआ है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शुक्रवार को एक चेतावनी जारी करते हुए कहा कि इससे उन लोगों के लिए ख़ासतौर पर ऐसी सामग्री की कमी का जोखिम बढ़ गया है जिन्हें उसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है. इनमें मुख्यतः स्वास्थ्यकर्मी और मरीज़ शामिल हैं.

आईसिल अब भी एक गंभीर आतंकवादी ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद निरोधक मामलों के अध्यक्ष व्लादिमीर वोरोन्कॉफ़ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवादी समूह आईसिल के ख़िलाफ़ लड़ाई में एकजुट रहने का आहवान करते हुए कहा है कि ये गुट अफ्रीका, योरोप और एशिया तक अपनी पहुँच बनाए हुए है. उन्होंने शुक्रवार को आईसिल पर अपनी ताज़ा रिपोर्ट सुरक्षा परिषद में पेश करते हुए ये अपील की.

टिकाऊ फ़ैशन है मौजूदा दौर की ज़रूरत

कपड़े बनाने में बहुत सारे रसायनों और पानी का इस्तेमाल होता है जो पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक है. फ़ैशन उद्योग क़रीब 10 फ़ीसदी कार्बन उत्सर्जन के लिए ज़िम्मेदार है. “सस्टेनेबेल फ़ैशन” यानी टिकाऊ फ़ैशन, एक उभरती हुई अवधारणा है जिसके तहत परिधान इस तरह से डिज़ाइन किए जाते हैं ताकि पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक हितों का ख़याल रखा जा सके. सस्टेनेबल फ़ैशन डिज़ाइनर रूना रे ‘ग्रीन फ़ैशन’ की एक बड़ी पैरोकार हैं और परिधानों के कार्बन फ़ुटप्रिंट घटाने व टिकाऊ फ़ैशन के लिए अपने अनुभव संयुक्त राष्ट्र में भी साझा कर चुकी हैं. पेश है यूएन हिन्दी न्यूज़ के साथ एक ख़ास बातचीत.

कोरोनावायरस: संक्रमितों की संख्या में मामूली कमी, मगर अभी अंधेरे में तीर

संयुक्त राष्ट्र ने कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्तियों की संख्या में मामूली सी गिरावट आने की ख़बरों का स्वागत किया है, मगर साथ ही ये भी कहा है कि इसमें बहुत ज़्यादा ख़ुशियाँ मनाने की बात नहीं है क्योंकि ख़तरा अभी कम नहीं हुआ है.

शरणार्थी पुनर्वास: अभी कम हैं मददगार हाथ!

दुनिया भर में वैसे तो लगभग 14 लाख शरणार्थी ऐसे हैं जिन्हें पुनर्वास की तुरंत ज़रूरत है मगर केवल 63 हज़ार 696 को ही वर्ष 2019 में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के ज़रिए फिर से ज़िन्दगी शुरू करने का मौक़ा मिला. ये शरणार्थियों की कुल संख्या का केवल साढ़े चार प्रतिशत हिस्सा है. कारण है कि दुनिया भर में सरकारों की तरफ़ से इन शरणार्थियों को पुनर्वास की समुचित पेशकश नहीं हो रही है.

कोरोनावायरस: अफ़वाहों से सावधान रहने की ज़रूरत

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोनावायरस के बारे में अफ़वाहों और ऑनलाइन माध्यमों पर दुष्प्रचार व झूठी सूचनाओं को रोकने के लिए कुछ अहतियाती उपाय किये हैं. ध्यान रहे कि मध्य चीन में कोरोनावायरस के कारण अभी तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों ने ग़लत जानकारी फैलाने की कोशिशों को ‘इन्फ़ोडेमिक’ क़रार दिया है.