वैश्विक

यूएन की भूमिका की कुछ झलकियाँ

संयुक्त राष्ट्र हर साल एक छोटे आकार का कार्ड प्रकाशित करता है, जिसमें दस सरल उदाहरणों के ज़रिये ये बताया जाता है कि इस वैश्विक संगठन ने दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाने में कैसे मदद की. संयुक्त राष्ट्र की 75वीं वर्षगाँठ के अवसर पर इस वर्ष, इसमें एक ग्यारहवीं वजह भी जोड़ी गई यानि कोविड-19 महामारी से मुक़ाबला.

 

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यूएन चार्टर: चुनौतीपूर्ण दौर में संयुक्त राष्ट्र के मज़बूत स्तम्भ की 75वीं वर्षगाँठ

दशकों पहले युद्ध की विभीषिका और बर्बादी झेल रही दुनिया में संयुक्त राष्ट्र चार्टर ने नियम आधारित व्यवस्था, शन्ति और आशा का संचार करने में अहम भूमिका निभाई थी. यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर के 75 वर्ष पूरे होने पर महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि मौजूदा समय में वैश्विक महामारी, विषमता व हिंसा की चुनौतियों के बीच चार्टर के मूल्यों और शान्तिपूर्ण सहअस्तित्व की अवधारणा की प्रासंगिकता बनी हुई है. 

कोविड-19: यूएन की जवाबी कार्रवाई पर रिपोर्ट जारी, पुनर्बहाली का रोडमैप 

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण विश्व में भारी उथलपुथल हुई है और स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक व सामाजिक जीवन व्यापक स्तर पर प्रभावित हुआ है. संयुक्त राष्ट्र इन हालात में लोगों की ज़िन्दगियाँ बचाने, वायरस पर क़ाबू पाने और आर्थिक संकट के दंश को कम करने के लिए अनेक मोर्चों पर मज़बूती से प्रयासों में जुटा है. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कोरोनावायरस संकट पर यूएन द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई पर गुरूवार को रिपोर्ट जारी करते हुए ये जानकारी दी है.  रिपोर्ट डिजिटल माध्यमों से जारी की गई है. 

यूएन चार्टर: रहनुमा

 विश्व में मौजूद चुनौतियों के सामने डटकर खड़ा होना तो ज़रूरी है, मगर समस्याओं का हल निकलाना भी उतना ही ज़रूरी है. और ये रहनुमाई मुहैया कराता है संयुक्त राष्ट्र चार्टर जिस पर 75 वर्ष पहले दस्तख़त किये गए थे. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 26 जून को यूएन चार्टर दिवस के मौक़े पर वीडियो सन्देश में कहा है कि चार्टर के सिद्धान्त आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं...

योग से शान्ति व सन्तुलन

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़), न्यूयॉर्क में कार्यरत, सिल्के वॉन ब्रोकहौसन के अनुसार कोविड-19 से उत्पन्न संकट के इस समय में योग से उन्हें शान्त, सन्तुलित और संगठित रहने में मदद करता है. योग करने के लिए किसी ख़ासियत की दरकार नहीं है. योगाभ्यास की कुछ झलकियाँ...

'यौन हिंसा क़तई बर्दाश्त नहीं'

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि कोविड-19 के कारण उत्पन्न माहौल में महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ हिंसा और उनके साथ बलात्कार के मामले बहुत तेज़ी से बढ़े हैं. पुरुषों और लड़कों को इस मुद्दे पर अपनी ज़िम्मेदारी समझनी होगी. आमिना जे मोहम्मद का वीडियो सन्देश...

महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा का मुद्दा – पुरुषों और लड़कों के नाम यूएन उपप्रमुख की अपील

संयुक्त राष्ट्र की उपमहासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाओं पर आँखें मूँद लेने लेने वाले पुरुषों और लड़कों को यह स्वीकार करना होगा कि वे भी इस हिंसा में भागीदार हैं.  विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के दौरान संयुक्त राष्ट्र ने पाया है कि वैश्विक स्तर पर घरेलू हिंसा के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है. तालाबन्दी और अन्य पाबन्दियों के कारण ज़्यादा सँख्या में महिलाओं को घर में ही रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. बहुत सी महिलाएँ तो उनके साथ दुर्व्यवहार के लिए ज़िम्मेदार साथी के साथ ही अपने घरों में सीमित हो गई हैं.

योगाभ्यास की एक झलक

इस वर्ष अन्तरराष्ट्रीय दिवस रविवार, 21 जून को मनाया गया. कोविड-19 महामारी के कारण ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र योग से सम्बन्धित ज़्यादातर गतिविधियाँ और आयोजन ऑनलाइन मंचों पर आयोजित किए गए. भारत के स्थाई उपप्रतिनिधि नागराज नायडू की योग गतिविधियाँ...

योग दिवस: कोविड-19 के दबावों से निपटने में विश्व को भारतीय भेंट की अहमियत

संयुक्त राष्ट्र 21 जून को छठा अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस मना रहा है जिस दौरान मानव स्वास्थ्य और बेहतर जीवन में इस प्राचीन और व्यापक प्रक्रिया की भूमिका की अहमियत को पहचान दी जा रही है. कोविड-19 महामारी से उत्पन्न अनेक तरह के दबावों और तनावों से निपटने के लिए भी योग को एक शक्तिशाली औज़ार समझा जाता है. 

विश्व शरणार्थी दिवस

दुनिया भर में लगभग आठ करोड़ ऐसे लोग हैं जिन्हें संघर्षों, हिंसा व अन्य कारणों से बेघर व विस्थापित होना पड़ा है. महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने विश्व शरणार्थी दिवस पर तमाम देशों को विस्थापितों व शरणार्थियों की हिफ़ाज़त करने की ज़िम्मेदारी याद दिलाई है. महासचिव का वीडियो सन्देश...