वैश्विक

कोरोनावायरस से निपटने की तैयारी में कोताही ना बरतने की अपील

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोनावायरस (COVID-19) के ऐसे मामलों के पता चलने पर चिंता ज़ाहिर की है जिनमें संक्रमित मरीज़ों का चीन से सीधा संबंध नहीं था. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी प्रमुख टैड्रोस एडहेनॉम घेबरेयेसस  ने ज़ोर देकर कहा है कि देशों को जितना समय मिला है उसका पूरा लाभ उठाते हुए पुख़्ता तैयारी सुनिश्चित की जानी चाहिए.

सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या 2030 तक 50 फ़ीसदी कम करने का लक्ष्य

सड़क सुरक्षा पर स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में तीसरे मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में वर्ष 2030 तक कम से कम 50 फ़ीसदी की कमी लाने की पुकार लगाई गई है. सड़क दुर्घटनाओं में हर साल 13 लाख से ज़्यादा मौतें होती हैं, पांच करोड़ से ज़्यादा लोग घायल होते हैं और देशों को उनके सकल घरेलू उत्पाद में तीन फ़ीसदी तक का नुक़सान उठाना पड़ता है.

जलवायु परिवर्तन व बाज़ारी शक्तियों के दबाव से बाल स्वास्थ्य को ख़तरा

विश्व का भविष्य बच्चों में मौजूद संभावनाओं के अनुरूप उनके फलने-फूलने और स्वास्थ्य-कल्याण पर निर्भर है लेकिन उनका बेहतर और टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने के लिए कोई भी देश पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों के एक आयोग ने बुधवार को अपनी नई रिपोर्ट जारी करते हुए बाल एवं किशोर स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन और बाज़ारी शक्तियों के दुष्प्रभाव की तरफ़ ध्यान आकृष्ट किया है.  

बदलती दुनिया में प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर चर्चा

पक्षियों, मछलियों व स्तनपायी जानवरों सहित वन्यजीवों की कई प्रजातियां भोजन व प्रजनन के लिए हर साल अपने ठिकानों से दूर अन्य स्थानों व देशों का रुख़ करती हैं. जलवायु परिवर्तन और जैवविविधता घटने के इस दौर में ऐसी प्रजातियों का ख़याल किस तरह रखा जा सकता है, इसी विषय पर प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण (CMS) के 13वें सम्मेलन, कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ यानी कॉप-13 में विचार-विमर्श हो रहा है. ये कॉप-13 सम्मेलन भारत के गुजरात राज्य की राजधानी गांधीनगर में आयोजित हो रहा है.

कोरोनावायरस: अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम पहुंची चीन

नॉवल कोरोनावायरस (COVID-19) संक्रमण से संबंधी जानकारी जुटाने और महामारी के प्रति समझ को पुख़्ता करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की एक टीम चीन पहुंच गई है. इस वायरस के संक्रमण के अब तक 70 हज़ार से ज़्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 1 हज़ार 700 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है.  यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा है कि अब तक के ऑंकड़े दर्शाते हैं कि यह वायरस अतीत के वायरसों - सार्स (SARS) और मर्स (MERS) - जितना घातक नहीं है.

कोरोनावायरस: 'पुख़्ता तैयारी में धन निवेश ज़रूरी'

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भरोसा जताया है कि  कोरोनावायरस और अन्य बीमारियों के ख़तरे से निपटने का सर्वश्रेष्ठ तरीक़ा महामारियों की जल्द पहचान करके उन्हें फैलने से रोकना है.  संगठन के मुताबिक दुनिया कोरोनावायरस के ख़तरे से निपटने के लिए पहले से कहीं बेहतर ढंग से तैयार है . यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ज़रूरतमंद देशों में लैब परीक्षण की क्षमता पुख़्ता करने के लिए मदद दे रही है और इस संबंध में पिछले एक हफ़्ते में हालात बेहतर हुए हैं.

'रेडियो लोगों को आपस में जोड़ता है'

ख़बरों, विस्तृत कार्यक्रमों और महत्वपूर्ण सूचनाओं के एक आसान स्रोत के रूप में रेडियो की पहचान सर्वविदित है. आम लोगों के साथ संवाद में रेडियो की महत्ता को पहचान देने के लिए हर वर्ष 13 फ़रवरी को रेडियो दिवस मनाया जाता है. महासचिव का संदेश...

'स्थायी शांति के लिए अहम' है संक्रमणकालीन न्याय प्रक्रिया

हिंसक संघर्षों व सामूहिक अत्याचारों के बाद देशों व समाजों के आगे बढ़ने के लिए पीड़ितों के कष्टों की शिनाख़्त और न्याय का सुनिश्चित होना ज़रूरी है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने शांति निर्माण और उसे बनाए रखने में संक्रमणकालीन न्याय (transitional justice) की भूमिका पर सुरक्षा परिषद में चर्चा के दौरान यह बात कही.

कोरोनावायरस: चीन से बाहर संक्रमित लोगों की संख्या 'आशंका से कहीं कम'

चीन में कोरोनोवायरस (COVID-19) संक्रमण के मामलों की बढ़ती संख्या के बीच यूएन विशेषज्ञ ने कहा है कि चीन से बाहर संक्रमण फैलने के मामले उतनी बड़ी संख्या में नहीं हैं जिनकी पहले आशंका जताई गई थी. विश्व स्वास्थ्य संगठन में स्वास्थ्य एमरजेंसी कार्यक्रम के प्रमुख डॉक्टर माइकल रायन ने स्पष्ट किया है कि भले ही वायरस संक्रमण की 'हिमशिला' फ़िलहाल उतनी विशाल ना हो, लेकिन जल्दबाज़ी में निष्कर्ष निकालने से बचना होगा. 

रेडियो: संवाद व विविधता को प्रोत्साहन देने का सशक्त माध्यम

तेज़ी से अपना स्वरूप बदल रही मीडिया में रेडियो अब भी एक ऐसा माध्यम है जिसमें लोगों को एकजुट करने और समुदायों के लिए महत्वपूर्ण ख़बरें व जानकारी उपलब्ध कराने की ताक़त है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ‘विश्व रेडियो दिवस’ पर अपने संदेश में रेडियो को एक ऐसा पथ-प्रदर्शक माध्यम बताया है जो विविधता को बढ़ावा और विश्व शांति में योगदान देता है.