एशिया प्रशांत

कोविड-19 'लॉकडाउन सबक़', युवाओं को प्रोत्साहन देने के लिए पहल

मादक पदार्थों और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNODC) ने भारत में अपने ‘एजुकेशन फॉर जस्टिस इनीशिएटिव’ कार्यक्रम के तहत कोविड-19 और टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी), और शांति एवं क़ानून पर इसके प्रभाव को लेकर छात्रों और शिक्षकों के साथ ऑनलाइन संवादों की 'लॉकडाउन लरनर्स' श्रृंखला शुरू की है.

रोहिंज्या पर समुद्री मुसीबत, हमदर्दी और दयालुता दिखाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी – UNHCR आश्रय स्थल के ज़रूरतमन्दों के प्रति हमदर्दी और दयालुता दिखाने की पुकार लगाई है. एजेंसी ने ये आहवान उस घटना के बाद किया है जिसमें म्याँमार से सुरक्षा के लिए निकले कम से कम 30 रोहिंज्या लोगों की बंगाल की खाड़ी में डूब जाने से मौत हो गई. ये लोग उस नाव में सवार थे जो लगभग दो महीने से समुद्र में ही ठहरी हुई थी क्योंकि उसे किसी देश में किनारे पर पहुँचने की इजाज़त नहीं मिली थी.

कोविड-19: साथी हाथ बढ़ाना

कोविड-19 का मुक़ाबला करने के लिए एकजुटता और मानवीय भावना से काम लेने की पुकार लगाई गई है. भारत में भी संयुक्त राष्ट्र के स्वयंसेवक (यूएनवी) अपने-अपने स्तर से मदद का हाथ बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं जिनसे जागरूकता फैलाने में मदद मिल रही है. एक वीडियो...

कोविड-19 का मुक़ाबला कॉमिक्स से भी

भारत में संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों ने भी कोविड-19 का मुक़ाबला करने में कोई क़सर नहीं छोड़ी है. पहला क़दम आमजन को जागरूक बनाना है जिसमें सही सूचना व जानकारी का प्रसार भी ज़रूरी है. इन्हीं प्रयासों में कॉमिक्स का भी सहारा लिया जा रहा है...

कोविड-19 और जलवायु एमरजेंसी से निपटने के लिए ख़र्च बढ़ाने पर ज़ोर

एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक व सामाजिक आयोग (UNESCAP) ने अपनी एक नई रिपोर्ट में कहा है कि इस क्षेत्र को कोविड-19 महामारी के दूरगामी आर्थिक और सामाजिक नतीजों का सामना करना पड़ रहा है. व्यापार, पर्यटन और वित्तीय संबंधों के कारण कोरोनावायरस के असर देश की सीमाओं से परे भी दिखाई दे रहे हैं.

'भारत में आमजन को तालाबंदी का मतलब समझाए जाने की ज़रूरत थी'

भारत में संयुक्त राष्ट्र की रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर रेनाटा डिज़ालिएन ने कहा है कि तालाबंदी के प्रभावों के बारे में आमजन को आसान भाषा में समझाए जाने की ज़रूरत थी और उन प्रभावों से निपटने के लिए समुचित नोटिस दिया जाना चाहिए था. यूएन न्यूज़ के साथ एक विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि देश में कोविड-19 से सामाजिक व आर्थिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है जिससे पूरी तरह निपटने में भारत सरकार द्वारा घोषित 24 अरब डॉलर का पैकेज भी कम साबित हो सकता है.

कोविड-19: असरदार कार्रवाई के लिए समाज की सहभागिता अहम

विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय (WHO SEARO) ने विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के फैलने की रफ़्तार तेज़ होने से गहरी हुई चिंताओं के बीच कहा है कि इस चुनौती से सरकारें व समाज पूरी तरह एकजुट होकर ही निपट सकते हैं. यूएन एजेंसी के मुताबिक कोरोनावायरस के फैलाव पर क़ाबू करने और मानव जीवन व अन्य संसाधनों को होने वाले नुक़सान को रोकने के लिए कार्रवाई के केंद्र में लोगों व समुदायों को रखना होगा. 

भारत में आंतरिक प्रवासियों की दशा पर चिंता, एकजुटता की पुकार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मशेल बाशेलेट ने कहा है कि भारत में कोविड-19 का मुक़ाबला करने के लिए लॉकडाउन यानी तालंबादी की अचानक हुई घोषणा से बुरी तरह प्रभावित हुए लाखों अंदरूनी प्रवासियों की विशाल तकलीफ़ें देखकर वो बहुत चिंतित हैं. उन्होंने कहा कि इन कामगारों को लॉकडाउन की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर अपने कामकाज के स्थानों को छोड़कर अपने घरों व मूल स्थानों के लिए रवाना होना पड़ा क्योंकि उनके पास भोजन व घर का किराया देने के लिए धन नहीं बचा था.

कोविड-19: भारत में ‘लॉकडाउन’ से प्रवासी कामगारों पर भारी मार

भारत में कोविड-19 का मुक़ाबला करने के प्रयासों के तहत 24 मार्च को घोषित 21 दिन के लॉकडाउन ने प्रवासी मजदूरों और दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं. दिहाड़ी पर काम करने वाले ज़्यादातर मज़दूर लम्बे समय तक तालाबंदी रहने की आशंका में बड़ी संख्या में अपने-अपने गांवों और स्थानों को वापस लौट पड़े. करफ़्यू की स्थिति होने के बावजूद हजारों प्रवासी मज़दूर सड़कों पर आ गए और पैदल ही अपने स्थानों के लिए चल निकले.
 

बांग्लादेश: कोविड-19 से बचाव के लिए फ़ेस मास्क बनाने में जुटा स्थानीय समुदाय

कोविड-19 महामारी फैलने की आंच बांग्लादेश तक भी पहुंच रही है और कॉक्सेस बाज़ार में रह रहे लाखों रोहिंज्या शरणार्थियों और स्थानीय समुदाय के स्वास्थ्य के लिए ख़तरा पैदा रहा है. इस बीमारी की रोकथाम के उपायों को इन समुदायों तक पहुंचाने के काम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे हैं. संक्रमण से उनकी सुरक्षा व बचाव के लिए एक नई पहल शुरू की गई है जिसमें स्थानीय समुदाय के सदस्य कपड़े के हज़ारों फ़ेस मास्क बना रहे हैं.