एशिया प्रशांत

भारत में शरणार्थी और मेज़बान समुदाय पर तालाबन्दी की मार

भारत में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) के साथ पंजीकृत 40 हज़ार 276 शरणार्थियों में से ज़्यादातर पहले ही जीवनयापन के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन कोरोनावायरस महामारी के कारण उनकी ज़िन्दगी और बिखर गई है. 

अफ़ग़ानिस्तान: शान्ति वार्ता से पहले हिंसा पर रोक व आम लोगों की रक्षा का आहवान 

अफ़ग़ान सरकार और तालिबान वार्ताकारों में शान्ति वार्ता की सम्भावनाओ के बीच अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने सभी पक्षों से आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रयास दोगुना करने का आग्रह किया है. यूएन मिशन ने कहा है कि इससे लोगों की ज़िन्दगियों की रक्षा करने और शान्ति वार्ता के लिए मददगार माहौल बनाना सम्भव होगा. यह शान्ति वार्ता क़तर की राजधानी दोहा में होनी है. 

पाकिस्तान: कराची स्टॉक एक्सचेंज पर हमले की कड़ी निन्दा 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान के कराची शेयर बाज़ार में 29 जून को हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निन्दा की है. परिषद ने इस हमले में मारे गए लोगों के प्रति अपनी सम्वेदनाएँ प्रकट करते हुए इसे जघन्य और कायराना हरकत क़रार दिया है. 

भारत: पत्रकार की हत्या की निन्दा, दोषियों को सज़ा की माँग

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, सांस्कृतिक एवँ वैज्ञानिक संगठन (UNESCO) की महानिदेशक ऑड्री अज़ोले ने भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त में पत्रकार शुभम मणि त्रिपाठी की हत्या के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर मुक़दमा चलाने की पुकार लगाई है. उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले में 19 जून को दो हमलावरों ने शुभम मणि त्रिपाठी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. 

15 लाख अफ़ग़ान ख़ानाबदोशों पर मुसीबत

अफ़ग़ानिस्तान में तालाबन्दी तीन महीनों के लिए और बढ़ा दी गई है, जिससे वहाँ के ख़ानाबदोश लोगों के स्वास्थ्य और आजीविका के लिए एक बड़ा ख़तरा पैदा हो गया है. आवाजाही पर प्रतिबन्ध लगने के कारण वो शहरों के बाज़ारों में अपने उत्पाद बेचने के लिये नहीं जा पा रहे हैं. ऐसे में कृषि विकास के लिए अन्तरराष्ट्रीय कोष (आईएफ़एडी) और सामुदायिक पशुधन व कृषि परियोजना (सीएलएपी) की एक संयुक्त परियोजना के तहत घी जैसे भण्डार योग्य उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने में मदद कर रही है, जिसे बाज़ार खुलने पर ज़्यादा बेचा जा सकता है. इसके अलावा कोविड-19 की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं और परिवारों को मास्क व साबुन सहित स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा किट भी प्रदान किए गए हैं...

पाकिस्तान: मानवाधिकार कार्यकर्ता की जबरन गुमशुदगी पर यूएन विशेषज्ञों का क्षोभ

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में लापता मानवाधिकार कार्यकर्ता इदरीस खटक के बारे में सरकार द्वारा जानकारी सार्वजनिक किये जाने का स्वागत किया है, लेकिन सात महीने से भी पहले उनके अचानक जबरन ग़ायब होने की घटना की कड़ी निन्दा भी की है. मानवाधिकार कार्यकर्ता इदरीस खटक को आख़िरी बार 13 नवम्बर 2091 को तब देखा गया था जब सुरक्षा एजेण्टों ने ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रान्त के स्वाबी इन्टरचेन्ज इलाक़े के पास उनकी कार को रोका था. 

कोविड-19: प्रभावित बच्चों के लिए यूनीसेफ़ का #ChildhoodChallenge अभियान

भारत की राजधानी नई दिल्ली में शुक्रवार को मशहूर बॉलीबुड अभिनेत्री और यूनीसेफ़ की सेलेब्रिटी एडवोकेट, करीना कपूर ख़ान ने #ChildhoodChallenge अभियान शुरू किया. ये अभियान यूनीसेफ़ के वैश्विक प्रयासों का हिस्सा है, जिसके तहत कोविड महामारी से बच्चों के भविष्य पर स्थाई असर पड़ने से बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं. 

'कोविड-19 जैसे संकट में ही संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता निहित'

संयुक्त राष्ट्र चार्टर की स्थापना को 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं. 26 जून 1945 को संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले 50 देशों में से एक भारत भी था. तब से लेकर आज तक,  संयुक्त राष्ट्र और भारत – दोनों ही बहुपक्षवाद में भागीदार रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र में भारत अहम योगदान देता रहा है. वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता को लेकर कई सवाल उठे हैं. संयुक्त राष्ट्र की उपयोगिकता और यूएन में भारत के योगदान पर भारत में संयुक्त राष्ट्र की रेज़ीडेंट कोऑर्डिनेटर, रेनाटा डेज़ालिएन का ब्लॉग. 

यूएन में भारत के कुछ ऐतिहासिक पल...

26 जून 1945 को संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले 50 देशों में से एक भारत भी था. दूसरे विश्व युद्ध के बाद, सभी राष्ट्र पहली बार एकजुट हुए. सभी राष्ट्र, आने वाली पीढ़ियों को युद्ध की विभीषिका से बचाने, मानवाधिकारों और पुरुषों व महिलाओं के समान अधिकारों के प्रति दोबारा विश्वास क़ायम करने व बड़े और छोटे राष्ट्रों के लिए समान रूप से, न्यायसंगत शर्तें स्थापित कर तथा स्वतन्त्र रूप से सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देने के लिये प्रतिबद्ध थे.


ऐतिहासिक सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व, रामास्वाराई मुदालियर ने किया, जिन्होंने चार्टर पर हस्ताक्षर भी किए. फिर 15 अगस्त, 1947 को, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आज़ाद भारत का झंडा फहराया गया और 54 देशों के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपना यथोचित स्थान हासिल किया. 
 

भारतीय नागरिकता अधिनियम: प्रदर्शनकारी नेताओं को रिहा करने का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत सरकार से उन सभी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा करने की अपील की है जिन्हें नागरिकता क़ानून में हुए संशोधन के विरोध में प्रदर्शन करने के लिए गिरफ़्तार किया गया है. नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) में भारत के अनेक पड़ोसी देशों से विशिष्ट धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए भारतीय नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया सरल और शीघ्रता से आगे बढ़ाने का प्रावधान है लेकिन मुसलमानों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है.