अफ्रीका

यमन: युद्ध में तेज़ी को रोकना होगा, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए

यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद के एक आपात सत्र में कहा कि देश में सरकार समर्थक सेनाओं और विद्रोहियों समर्थित लड़ाकों के बीच हिंसा में हाल के समय में आई तेज़ी को रोकना होगा, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए. दोनों पक्षों के बीच बीते कुछ सप्ताहों के दौरान कुछ शांति बनी हुई थी.

लीबिया: जनता की भलाई व स्थिरता की ख़ातिर, राजनैतिक हल ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि लीबिया में अनेक वर्षों से जारी संघर्ष के कारण मानवीय स्थिति ख़तरनाक हो गई है, लाखों आम लोगों को भारी तकलीफ़ों का सामना करना पड़ रहा है और वहाँ संघर्ष और भीषण होने के साथ-साथ तबाही भी बढ़ती जा रही है. 

हेती: भूकंप के प्रभावितों की याद, भविष्य संवारने में मदद का वादा भी

हेती में जनवरी 2010 में आए विनाशकारी भूकंप में लगभग दो लाख 20 लोगों की मौत हो गई थी और तीन लाख से ज़्यादा घायल हुए थे. मृतकों में संयुक्त राष्ट्र के 102 कर्मचारी भी थे.  केवल 35 सेकंड तक चले 7.0 की तीव्रता वाले उस भूकंप के बाद लगभग 15 लाख लोग बेघर भी हो गए थे. भूकंप के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रभावितों को यूएन मुख्यालय में शुक्रवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में सम्मान के साथ याद किया गया.

लीबिया: लगातार लड़ाई से बच्चे 'भयंकर व असहनीय' स्थिति में

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने कहा है कि विश्व को लीबिया में लगातार जारी युद्ध के कारण बच्चों की "भंयकर और असहनीय" स्थिति को क़तई स्वीकार नहीं करना चाहिए. इस बीच लीबिया की स्थिति पर एक महत्वपूर्ण सम्मेलन रविवार को जर्मनी में हो रहा है जिसमें यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के अलावा लीबिया के अहम प्रतिनिधियों के भी शिरकत करने की संभावना है और कोई शांति समझौता भी होने की उम्मीद जताई गई है.

'माली में शांति समझौता लागू करना ही स्थिरता का एक मात्र रास्ता'

संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा विभाग के प्रमुख ज्याँ पियर लैक्रोइ ने बुधवार को सुरक्षा परिषद को बताया कि माली में 2015 के शांति समझौते को लागू करना ही देश में स्थिरता स्थापित करने का एक मात्र प्रशस्त करता है. ज्याँ पियर लैक्रोइ ने पश्चिम अफ्रीकी देश माली में ताज़ा स्थिति के बारे में सुरक्षा परिषद को अवगत कराया.

हेती भूकंप विनाश के दस वर्ष: यूएन मदद जारी रखने का संकल्प

12 जनवरी 2010 को हेती में सिर्फ़ 35 सेकंड का एक भूकंप आया मगर उसकी तीव्रता 7.0 थी जिसने राजधानी पोर्ट ओ प्रिंस को दहलाकर रख दिया. उस महाविनाशकारी भूकंप में लगभग 2 लाख 20 लोगों की मौत हुई और तीन लाख से ज़्यादा घायल हुए. लगभग 15 लोगों के घर छिन गए. महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने उस भूकंप के दस वर्ष पूरे होने पर जारी अपने संदेश में कहा है कि संयुक्त राष्ट्र हेती और वहाँ के लोगों के बेहत भविष्य निर्माण में मदद करना जारी रखेगा. (यूएन महासचिव का वीडियो संदेश...)

हेती: विनाशकारी भूकंप के दस वर्ष, यूएन मदद जारी रखने का वादा

12 जनवरी 2010 को हेती में 7.0 की तीव्रता वाला भूकंप आया जिसने राजधानी पोर्ट ओ प्रिंस को दहलाकर रख दिया. हेती सरकार के आँकड़ों के अनुसार उस भूकंप में लगभग दो लाख 20 हज़ार लोगों की जान चली गई थी. इनमें संयुक्त राष्ट्र के 102 कर्मचारी भी थे. हेती में संयुक्त राष्ट्र मिशन के मुख्यालय वाली इमारत भी ढह जाने से इन कर्मचारियों की मौत हुई. 

डीआरसी: अंतरजातीय हिंसा के मामले 'युद्ध अपराध' के 'दायरे में'

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में हेमा समुदाय को निशाना बनाकर की गई हिंसा के मामलों को युद्ध अपराध की श्रेणी में परिभाषित किया जा सकता है. काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र साझा मानवाधिकार कार्यालय (UNJHRO) द्वारा की गई जांच के मुताबिक़ हेमा और लेंडु समुदाय के बीच अंतरजातीय हिंसा में 701 लोगों की मौत हुई और 168 घायल हुए जिनमें अधिकांश पीड़ित लोग हेमा समुदाय के थे.

पश्चिम अफ़्रीका और साहेल में आतंकवादी हमलों में भारी बढ़ोत्तरी

पश्चिम अफ़्रीका और साहेल क्षेत्र में जुलाई 2019 से आम नागरिकों और सैन्य ठिकानों पर आतंकवादी हमलों में तेज़ी आई है जिनके मानवीय नतीजे भयावह और बेहद चिंतित करने वाले हैं. पश्चिम अफ़्रीका और साहेल क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के प्रमुख और यूएन महासचिव के विशेष प्रतिनिधि मोहम्मद इब्न चाम्बस ने बुधवार को सुरक्षा परिषद में एक नई रिपोर्ट पेश करते हुए यह जानकारी दी है.

सूडान में सांप्रदायिक झड़पों के बाद हज़ारों विस्थापित

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता कार्यों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने मंगलवार को सूडान के सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि देश के पश्चिम दार्फ़ूर प्रांत में सांप्रदायिक झड़पों के बाद लगभग 40 हज़ार लोगों को विस्थापित होना पड़ा है.