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महासागरों के बग़ैर पृथ्वी पर मानव जीवन असम्भव - महासभा प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कान बोज़किर ने कहा है कि महासागरों पर मंडराते संकट पर पार पाने के लिये, स्पष्ट, रूपान्तरकारी और व्यावहारिक समाधानों का तत्काल सहारा लिया जाना होगा.  उन्होंने वर्ष 2022 में महासागरों से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन से पहले की तैयारियों के तहत आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि ऐसा कोई परिदृश्य नहीं है जिसमें पृथ्वी पर महासागरों के बग़ैर जीवन की कल्पना की जा सके.

महामारी के अन्त और वैश्विक पुनर्बहाली की योजना - वैक्सीन समता पर बल

अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैन्क समूह (WBG), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के प्रमुखों ने मंगलवार को एक साझा वक्तव्य जारी करते हुए, देशों की सरकारों से 50 अरब डॉलर के रोडमैप को वित्तीय समर्थन देने का आग्रह किया है. कोविड-19 महामारी के अन्त और तेज़ पुनर्बहाली को सुनिश्चित किये जाने पर लक्षित इस योजना के ज़रिये विकासशील देशों में, वैक्सीनों, परीक्षणों और उपचारों की विषमता को दूर करना है.

कोविड-19: नेपाल के लिये समर्थन व एकजुटता की अपील

नेपाल में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधि डॉक्टर राजेश पाण्डव ने देश में मौजूदा कोरोनावायरस संकट के मद्देनज़र, अन्य देशों से वैक्सीन की अतिरिक्त ख़ुराकों को नेपाल के साथ साझा किये जाने की अपील की है. वैश्विक महामारी कोविड-19 की भीषण लहर की चपेट में आए नेपाल में, संक्रमितों का आँकड़ा पाँच लाख को पार कर गया है और अब तक सात हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

महामारियों से निपटने की तैयारियों के लिये अन्तरराष्ट्रीय सन्धि की पुकार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सदस्य देशों को आगाह किया है कि यह मानना एक बड़ी भूल होगी कि वैश्विक महामारी कोविड-19 का संकट गुज़र चुका है. यूएन एजेंसी प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने मौजूदा कोरोनावायरस संकट से सबक़ लेते हुए एक अन्तरराष्ट्रीय समझौते का आग्रह किया है, ताकि भावी वैश्विक स्वास्थ्य ख़तरों के प्रति समय से पहले चेतावनी प्रणाली को बेहतर बनाया जा सके और वैक्सीनों, उपचारों व परीक्षणों को न्यायोचित ढँग से उपलब्ध कराना सम्भव हो.

शान्तिरक्षा मिशन: कौशल निखारने व अनुभव हासिल करने का अवसर

दक्षिण सूडान में यूएन मिशन (UNMISS) में सैन्य पर्यवेक्षक के तौर पर सेवारत, भारतीय शान्तिरक्षक मेजर तेजस्मिता मंजूनाथ का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र मिशन, समुदायों में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर प्रदान करते हैं. उन्होंने यूएन न्यूज़ के साथ एक ख़ास बातचीत में बताया कि कोविड-19 संकट काल बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है, मगर एक शान्तिरक्षक व सैन्यकर्मी के तौर पर मिली ट्रेनिंग ने उन्हें, निजी मुश्किलों को पीछे छोड़कर, अपनी ज़िम्मेदारी बख़ूबी निभाने के लिये तैयार किया है...

वैश्विक शान्ति व सुरक्षा में युवाओं का अहम योगदान

विश्व भर में शान्ति व सुरक्षा को बढ़ावा देने में युवजन की महत्वपूर्ण भूमिका है. संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा अभियान, युवाओं की आवाज़ों को बुलन्द और योजनाओं व निर्णय-निर्धारण में उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करते हैं. इस वर्ष, 29 मई को, अन्तरराष्ट्रीय यूएन शान्तिरक्षक दिवस के अवसर पर अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा में युवाओं के योगदान पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. एक वीडियो नज़र...

कोविड-19: वैक्सीन उत्पादन बढ़ाने व न्यायसंगत वितरण के लिये तत्काल प्रयास ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सचेत किया है कि दुनिया, कोविड-19 वैक्सीन की न्यायसंगत उपलब्धता सुनिश्चित करने के लक्ष्य से बहुत दूर है. उन्होंने शुक्रवार को इन जीवनरक्षक उपायों की न्यायोचित सुलभता के विषय पर आयोजित एक ऑनलाइन चर्चा के दौरान ज़ोर देकर कहा कि इस त्रासदी से हर हाल में बचा जाना होगा.

इथियोपिया: युद्ध से बदहाल टीगरे क्षेत्र में ख़राब हालात पर गम्भीर चिन्ता

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने इथियोपिया के टीगरे क्षेत्र में विस्थापित आबादी के साथ दुर्व्यवहार के मामलों पर गहरी चिन्ता जताई है. ख़बरों के अनुसार कम से कम 200 घरेलू विस्थापितों को मनमाने ढँग से गिरफ़्तार किया गया है. पिछले कई महीनों की लड़ाई के कारण, हिंसा प्रभावित व विस्थापन का शिकार लोग, गम्भीर खाद्य असुरक्षा का भी सामना कर रहे हैं.

भारत: कोविड-19 की दूसरी लहर ज़्यादा जानलेवा

भारत में संयुक्त राष्ट्र की रैज़िडेण्ट कोऑर्डिनेटर, रेनाटा डेज़ालिएन ने कहा है कि देश में कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर और वायरस के फैलाव की तेज़ रफ़्तार ने सभी को हैरान कर दिया है. उन्होंने सचेत किया है कि इससे सबक़ लेकर सम्भावित तीसरी लहर से निपटने के लिये स्वास्थ्य तैयारियों को पुख़्ता बनाना होगा. 

पर्यावरणीय संकटों से निपटने के लिये प्रकृति में निवेश पर बल

संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक ताज़ा रिपोर्ट दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन, जैवविविधता और भूमि क्षरण, आपस में जुड़े इन संकटों से सफलतापूर्वक निपटने के लिये, मौजूदा समय से लेकर वर्ष 2050 तक, प्रकृति में कुल आठ ट्रिलियन डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी.