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'विश्व नगरीय मंच' में भविष्य के शहरों पर चर्चा

शहरों के भविष्य पर चर्चा के लिए संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी आबू धाबी में शनिवार को ‘विश्व नगरीय मंच’ की शुरुआत हुई है जिसमें टिकाऊ व समावेशी शहरों के निर्माण में युवाओं, महिलाओं, ज़मीनी समुदायों, स्थानीय व क्षेत्रीय सरकारों और व्यवसायों की भूमिका पर विचार-विमर्श होगा. छह दिनों तक चलने वाली यह बैठक पहली बार अरब क्षेत्र में आयोजित की गई है. 

हिंसक चरमपंथ के विरुद्ध लड़ाई में अफ़्रीकी देशों को मदद की अपील

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफ़्रीका में सुरक्षा परिषद समर्थित आतंकवाद-विरोधी अभियानों की अहमियत को समझने की पुकार लगाई है. यूएन प्रमुख ने कहा है कि अफ़्रीकी महाद्वीप पर आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ के बढ़ते ख़तरे से निपटने के लिए इस लड़ाई में पर्याप्त फ़ंडिंग और समर्थन की आवश्यकता है. 

कोरोनावायरस: फ़ेस मास्क व अन्य एहतियाती सामग्री की मांग में आसमानी उछाल

चीन के अलावा अन्य देशों में कोरोनावायरस से संक्रमित मरीज़ों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ  फ़ेस मास्क सहित अन्य एहतियाती सामग्री की मांग में भारी इज़ाफ़ा हुआ है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शुक्रवार को एक चेतावनी जारी करते हुए कहा कि इससे उन लोगों के लिए ख़ासतौर पर ऐसी सामग्री की कमी का जोखिम बढ़ गया है जिन्हें उसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है. इनमें मुख्यतः स्वास्थ्यकर्मी और मरीज़ शामिल हैं.

आईसिल अब भी एक गंभीर आतंकवादी ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद निरोधक मामलों के अध्यक्ष व्लादिमीर वोरोन्कॉफ़ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवादी समूह आईसिल के ख़िलाफ़ लड़ाई में एकजुट रहने का आहवान करते हुए कहा है कि ये गुट अफ्रीका, योरोप और एशिया तक अपनी पहुँच बनाए हुए है. उन्होंने शुक्रवार को आईसिल पर अपनी ताज़ा रिपोर्ट सुरक्षा परिषद में पेश करते हुए ये अपील की.

टिकाऊ फ़ैशन है मौजूदा दौर की ज़रूरत

कपड़े बनाने में बहुत सारे रसायनों और पानी का इस्तेमाल होता है जो पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक है. फ़ैशन उद्योग क़रीब 10 फ़ीसदी कार्बन उत्सर्जन के लिए ज़िम्मेदार है. “सस्टेनेबेल फ़ैशन” यानी टिकाऊ फ़ैशन, एक उभरती हुई अवधारणा है जिसके तहत परिधान इस तरह से डिज़ाइन किए जाते हैं ताकि पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक हितों का ख़याल रखा जा सके. सस्टेनेबल फ़ैशन डिज़ाइनर रूना रे ‘ग्रीन फ़ैशन’ की एक बड़ी पैरोकार हैं और परिधानों के कार्बन फ़ुटप्रिंट घटाने व टिकाऊ फ़ैशन के लिए अपने अनुभव संयुक्त राष्ट्र में भी साझा कर चुकी हैं. पेश है यूएन हिन्दी न्यूज़ के साथ एक ख़ास बातचीत.

सीरिया: रोकना होगा जानमाल का नुक़सान और विशाल विस्थापन

सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गियर पीडरसैन ने कहा है कि सीरिया के पश्चिमोत्तर इलाक़े – इदलिब में हवाई और ज़मीनी हमलों में आई तेज़ी के कारण विस्थापित होने वाले लोगों की बाढ़ सी आ गई है और जान-माल का भी भारी नुक़सान हुआ है.

कोरोनावायरस: संक्रमितों की संख्या में मामूली कमी, मगर अभी अंधेरे में तीर

संयुक्त राष्ट्र ने कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्तियों की संख्या में मामूली सी गिरावट आने की ख़बरों का स्वागत किया है, मगर साथ ही ये भी कहा है कि इसमें बहुत ज़्यादा ख़ुशियाँ मनाने की बात नहीं है क्योंकि ख़तरा अभी कम नहीं हुआ है.

महिला ख़तना के कारण हर साल अरबों डॉलर का नुक़सान

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि महिला जननांग विकृति यानी महिला ख़तना ना केवल महिलाओं के स्वास्थ्य और अच्छे रहन-सहन के लिए गंभीर ख़तरे पैदा करता है बल्कि इसके कारण विशाल आर्थिक नुक़सान भी होता है. इस दर्द भरी प्रथा के स्याह पक्षों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसे रोकने के लिए हर वर्ष 6 फ़रवरी को अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है.

हथियारों की बेरोक-टोक आपूर्ति और उपलब्धता से होती हैं लाखों मौतें

संयुक्त राष्ट्र की निरस्त्रीकरण प्रमुख इज़ूमी नाकामीत्सू ने कहा है कि दुनिया भर में साल 2010 से 2015 के बीच हिंसक कारणों से जितनी मौतें हुईं उनमें से लगतभग 50 फ़ीसदी मौतों के लिए छोटे हथियारों का इस्तेमाल हुआ. नाकामीत्सू ने बुधवार को सुरक्षा परिषद को बताया कि दुनिया भर में हर साल दो लाख से भी ज़्यादा लोगों की मौत हिंसक कारणों से हो जाती है.

शरणार्थी पुनर्वास: अभी कम हैं मददगार हाथ!

दुनिया भर में वैसे तो लगभग 14 लाख शरणार्थी ऐसे हैं जिन्हें पुनर्वास की तुरंत ज़रूरत है मगर केवल 63 हज़ार 696 को ही वर्ष 2019 में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के ज़रिए फिर से ज़िन्दगी शुरू करने का मौक़ा मिला. ये शरणार्थियों की कुल संख्या का केवल साढ़े चार प्रतिशत हिस्सा है. कारण है कि दुनिया भर में सरकारों की तरफ़ से इन शरणार्थियों को पुनर्वास की समुचित पेशकश नहीं हो रही है.