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कोविड-19: पर्यटन सैक्टर की बेहतर पुनर्बहाली के लिये सिफ़ारिशें पेश

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 से पर्यटन सैक्टर पर भारी असर हुआ है और 10 करोड़ से ज़्यादा लोगों के रोज़गारों के पर संकट मँडरा रहा है. कोरोनावायरस संकट से बेहतर ढँग से उबरने के लिये संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने नई सिफ़ारिशें जारी की हैं जिनमें पर्यटन क्षेत्र की मज़बूत पुनर्बहाली के लिये प्लास्टिक प्रदूषण से लड़ाई को तेज़ी से आगे बढ़ाना होगा.  

समुद्र में फँसे नाविकों की व्यथा - “मेरे बच्चे पूछते हैं कि मैं घर कब आ रहा हूँ”

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के फैलाव से बचाव के लिये ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र यात्रा सम्बन्धी पाबन्दियाँ लागू की गई हैं जिनसे लाखों नाविक (Seafarers) भी प्रभावित हुए हैं. घर-परिवार से दूर समुद्र में फँसे नाविकों के लिये गहरी और लम्बी अनिश्चितता जल्द ख़त्म होती नज़र नहीं आती और मौजूदा हालात से उनका मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है.

मध्य पूर्व में अदावत फिर बढ़ी, कोविड -19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में मुश्किलें

मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत निकोलय म्लैदमॉफ़ ने कहा है कि कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों में इसराइली और फ़लस्तीनियों के बीच नज़र आई एकजुटता अब बिखरने लगी है जिससे लोगों की ज़िन्दगी के लिए जोखिम पैदा होने के साथ-साथ अर्थव्यस्था में मन्दी आने लगी है. साथ ही इसराइल द्वारा पश्चिमी तट के कुछ इलाक़ों को छीनने का ख़तरा भी बरक़रार है.

बांग्लादेश, भारत और नेपाल में बाढ़ से हालात विकट

बांग्लादेश में बाढ़ से बड़े पैमाने पर जनजीवन प्रभावित हुआ है और हज़ारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है. भारत के असम राज्य और पड़ोसी देश नेपाल में भी मॉनसून की बारिश के बाद बाढ़ से हालात गम्भीर हैं. 40 लाख से ज़्यादा लोग अभी तक विस्थापित हुए हैं और 189 लोगों की मौत होने की पुष्टि हुई है. 
 

वनों की कटाई में कमी, लेकिन चिन्ता बरक़रार

खाद्य एवँ कृषि एजेंसी (FAO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि पिछले तीन दशकों में विश्व भर में 17 करोड़ हैक्टेयर से ज़्यादा क्षेत्र में फैले वन लुप्त हो गए हैं. लेकिन इसी अवधि में वनों की कटाई की रफ़्तार में गिरावट भी दर्ज की गई है. रिपोर्ट में टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने में वनों की अहमियत को रेखांकित करते हुए टिकाऊ वन प्रबन्धन पर भी ज़ोर दिया गया है.  

कोविड-19: उबरने के प्रयासों में महिलाओं की व्यापक भागीदारी ज़रूरी

ऐसे में जबकि महिलाओं के स्वास्थ्य के लिये निर्धारित संसाधन भी कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने में इस्तेमाल किये जा रहे हैं तो मंगलवार को इस मुद्दे पर चर्चा हुई कि लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के लिये 25 वर्ष पहले तय किये गए लक्ष्यों को हासिल करने की रफ़्तार किस तरह तेज़ की जाए. इस चर्चा में सरकारों के प्रतिनिधि, सिविल सोसायटी नेताओं, कम्पनियों के शीर्ध अधिकारियों और शैक्षिक विशेषज्ञों ने वर्चुअल माध्यमों से शिरकत की.

यमन: कोविड-19 के माहौल में लोग डर, नफ़रत और विस्थापन की भी चपेट में

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता कार्यकर्ताओं ने कहा है कि यमन में कोविड-19 महामारी के फैलने के डर ने लोगों को नए सिरे से विस्थापित होने के लिये मजबूर कर दिया है. अनेक वर्षों से युद्धग्रस्त देश यमन में बहुत से लोगों को जीवित रहने की ख़ातिर अपने पास बचा-खुचा सामान बेचने के लिये भी मजबूर होना पड़ा है. 

प्रतिष्ठित पर्यावरण पुरस्कार के लिये 35 युवा होनहार पहुँचे फ़ाइनल में

संयुक्त राष्ट्र के एक सर्वाधिक प्रतिष्ठित पर्यावरण पुरस्कार के लिये अनोखी रचनाशीलता व नवाचार निर्माणशील विचारों के लिये 35 युवाओं को क्षेत्रीय स्तर पर सूचीबद्ध किया गया है. इनमें अमेज़ॉन की आदिवासी भूमि का खोजी व साहसिक यात्राओं के ज़रिये संरक्षण, अमेरिका में हानिकारक कार्बन उत्सर्जन को मूल्यवान उपभोग संसाधानों में तब्दील करना, नाईजीरिया में पानी से बिजला उत्पादन जैसे नवीन विचार व प्रयोग शामिल हैं जिनके लिये इन युवाओं को नामांकित किया गया है.

कोविड-19: आदिवासी समुदायों में संक्रमण बढ़ने से बढ़ी चिन्ता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि वैसे तो कोविड-19 से हर इन्सान प्रभावित हुआ है लेकिन विश्व के निर्धनतम और निर्बलतम लोगों के लिये इस महामारी का जोखिम ज़्यादा है. वायरस से सबसे अधिक प्रभावितों में आदिवासी समुदाय, विशेषत: अमेरिका क्षेत्र के आदिवासी लोग भी हैं जहाँ अब यह महामारी तेज़ रफ़्तार से फैल रही है. यूएन एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने सोमवार को बताया कि 6 जुलाई तक अमेरिका क्षेत्र में 70 हज़ार आदिवासी लोगों के संक्रमित होने और दो हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौतें होने की पुष्टि हुई थी.

नेलसन मण्डेला पुरस्कार 2020

मानवीय भलाई के कार्यों के लिये दिया जाने वाला दूसरा नेलसन मण्डेला पुरस्कार दो समाज सेवियों - मारियाना वी वार्दिनॉयानिस (ग्रीस) और डॉक्टर मॉरीसैण्डा कोयाते (गिनी) को दिया गया है. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने नेलसन मण्डेला पुरस्कार का प्रस्ताव 2014 में पारित किया था और पहला पुरस्कार 2015 में नामीबिया की डॉक्टर हेलेना न्ड्यूमे और पुर्तगाल के होर्गे फ़र्नाण्डो सैम्पाइयो को दिया गया था. ये पुरस्कार हर पाँच वर्ष में एक महिला और एक पुरुष को दिया जाता है... वीडियो....