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तापमान वृद्धि को रोकने में, मीथेन गैस कटौती की अहम भूमिका

संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मानव गतिविधि द्वारा उत्पन्न मीथेन गैस का उत्सर्जन, इस दशक में 45 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है, जिससे पेरिस जलवायु समझौते की शर्तों के अनुरूप, वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने में मदद मिलेगी.

भारत: वैक्सीन उत्पादन बढ़ाने की ज़रूरत

भारत में संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की प्रतिनिधि, डॉक्टर यासमीन अली हक़ ने, कोविड-19 संकट के दौरान, सबसे अहम ज़रूरतों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए, देश में टीकाकरण जारी रखने पर बल दिया है. उन्होंने यूएन न्यूज़ के साथ एक ख़ास बातचीत में ज़ोर देकर कहा कि वैश्विक महामारी पर जवाबी कार्रवाई के तहत, सभी देशों को एक साथ मिलकर, वैक्सीन उत्पादन का दायरा व स्तर बढ़ाने के लिये रणनीति बनानी चाहिये.

 

जलवायु संकट: नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन के संकल्प की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सभी देशों से, वर्ष 2050 तक नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य साकार करने का आहवान किया है, ताकि इस सदी के अन्त तक, वैश्विक तापमान में 2.4 डिग्री सेल्सियस की विनाशकारी बढ़ोत्तरी को टाला जा सके. उन्होंने गुरूवार को जर्मनी के पीटर्सबर्ग में आयोजित उच्चस्तरीय जलवायु बैठक को सम्बोधित करते हुए भरोसा जताया है कि कार्बन उत्सर्जन से उपजे पर्यावरणीय झटकों के सबसे ख़राब प्रभावों की रोकथाम अब भी सम्भव है.

प्राण निछावर करने वाले यूएन कर्मचारियों की स्मृतियों को सहेजने का संकल्प

संयुक्त राष्ट्र ने उन 336 कर्मचारियों को एक स्मरण समारोह में श्रृद्धांजलि अर्पित की है, जिन्होंने वर्ष 2020 में अपने दायित्व का निर्वहन करते समय, अपना सर्वोच्च बलिदान किया. किसी एक वर्ष में अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राण निछावर करने वालों की यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. यूएन महासचिव ने गुरूवार को आयोजित एक ऑनलाइन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए, इन सभी कर्मचारियों को सदैव याद रखने का संकल्प लिया है.

कोविड-19: वैक्सीन पेटेण्ट अधिकारों में छूट, 'अभूतपूर्व अमेरिकी समर्थन' का स्वागत

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कोविड-19 वैक्सीन के बौद्धिक सम्पदा अधिकारों में छूट के लिये अमेरिकी सरकार द्वारा समर्थन दिये जाने की घोषणा का स्वागत किया है. महासचिव गुटेरेश ने इस निर्णय को अभूतपूर्व क़रार देते हुए कहा है कि यह वैक्सीन उत्पादकों के लिये, ज्ञान व टैक्नॉलॉजी को साझा करने का अवसर है, जिससे स्थानीय स्तर पर वैक्सीन उत्पादन के प्रभावशाली विस्तार की सम्भावना को मूर्त रूप दिया जा सकेगा.    

म्याँमार: स्वास्थ्य केन्द्रों पर हमलों से ख़तरे में कोविड-19 जवाबी कार्रवाई

म्याँमार में 1 फ़रवरी को सैन्य तख़्ता पलट के बाद से अब तक चिकित्साकर्मियों और मेडिकल केन्द्रों पर कम से कम 158 हमले हो चुके हैं और विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले 139 डॉक्टरों को गिरफ़्तार किया गया है. म्याँमार में संयुक्त राष्ट्र के कार्यालय ने बुधवार को कहा है कि मौजूदा हालात में कोविड-19 पर जवाबी कार्रवाई के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्व स्वास्थ्य सेवाओं के लिये भी जोखिम पैदा हो गया है.   

भारत: कोविड-19 से निपटने के उपायों और वैक्सीन उत्पादन का विस्तार ज़रूरी

भारत में कोविड-19 संक्रमण के मामलों में आई तेज़ी से भयावह स्थिति पैदा हो गई है. देश में संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की प्रतिनिधि, डॉक्टर यासमीन अली हक़ ने यूएन न्यूज़ के साथ एक ख़ास बातचीत में कहा कि इस संकट के दौरान, सबसे अहम ज़रूरतों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए, टीकाकरण जारी रखना होगा. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वैश्विक महामारी पर जवाबी कार्रवाई के तहत सभी देशों को एक साथ मिलकर, वैक्सीन उत्पादन का दायरा व स्तर बढ़ाने के लिये रणनीति बनानी चाहिए.

कोविड-19: एक सप्ताह में, कुल संक्रमण मामलों के 46 फ़ीसदी भारत में

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का विश्लेषण दर्शाता है कि कोविड-19 महामारी शुरू होने के बाद से संक्रमण के अब तक पुष्ट मामले, अपने उच्चतम स्तर पर लगातार दूसरे सप्ताह बरक़रार है. पिछले सात दिनों में, संक्रमण के 53 लाख नए मामले दर्ज किये गए हैं जिनमे से लगभग 46 प्रतिशत मामले भारत में सामने आए हैं.  

15 करोड़ लोग गम्भीर खाद्य असुरक्षा के पीड़ित, हिंसक संघर्ष हैं बड़ी वजह

हिंसक संघर्ष, चरम मौसम की घटनाओं और कोविड-19 से उपजे आर्थिक झटकों के कारण, वर्ष 2020 में कम से कम 15 करोड़, 50 लाख लोगों को संकट के स्तर पर खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ा है. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने बुधवार को एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें प्रभावितों तक राहत पहुँचाने, व्यापक पैमाने पर मौतें टालने और आजीविकाएँ ढहने से बचाने के लिये तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया गया है.  

विश्व में नौ लाख दाइयों की कमी से उपजी चिन्ता – नई रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और साझीदार संगठनों की एक नई रिपोर्ट, दुनिया में व्यापक स्तर पर दाइयों (Midwives) की कमी को दर्शाती है, जिनकी स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में लाखों महिलाओं व नवजात शिशुओं की या तो मौत हो रही है या फिर वे अस्वस्थता के शिकार हो रहे हैं. रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2035 तक इन स्वास्थ्य सेवाओं में समुचित निवेश के ज़रिये, हर वर्ष 43 लाख ज़िन्दगियों को बचाया जा सकता है.