वर्ष 2026 यूएन स्वयंसेवा (UNV) को सतत विकास की स्थाई शक्ति बनाने का अवसर
वर्ष 2026 संयुक्त राष्ट्र स्वयंसेवा (UNV) की भूमिका को नए सिरे से देखने का अवसर है - विशेषकर ऐसे समय में, जब समुदायों तक स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और सरकारी योजनाओं की पहुँच को और मज़बूत बनाने की ज़रूरत है. ये कहना है यूएन स्वयंसेवक कार्यक्रम (UNV) के एक वरिष्ठ अधिकारी आन्द्रेई पोगरेबन्याक का जिन्होंने वर्ष 2026 में बेहतर नीतियों, अधिक निवेश और स्वयंसेवकों के लिए मज़बूत समर्थन की दिशा में ठोस बदलाव पर ज़ोर दिया है.
यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा ने इसी सन्दर्भ में, संयुक्त राष्ट्र स्वयंसेवक कार्यक्रम (UNV) के एशिया-प्रशान्त क्षेत्रीय प्रबन्धक आन्द्रेई पोगरेबन्याक से बातचीत की है, जिसमें उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक स्थानीय ज़रूरतों को समझते हैं और लोगों को उन सेवाओं से जोड़ने में मदद करते हैं, जिनकी उन्हें सबसे अधिक आवश्यकता होती है.
उन्होंने भारत के आदि कर्मयोगी फ़ैलोशिप कार्यक्रम का उदाहरण दिया, जिसके तहत दूरदराज़ जनजातीय क्षेत्रों में युवा स्वयंसेवकों ने परिवारों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं तक पहुँचने में मदद की है.
उनके अनुसार वर्ष 2026, स्वयंसेवा को मज़बूत समर्थन, नीतियों और निवेश से जोड़कर एक स्थाई विरासत छोड़ सकता है.
यूएन न्यूज़: आपकी भारत की यात्रा के दौरान आपके प्रमुख उद्देश्य व निष्कर्ष क्या रहे?
आन्द्रेई पोगरेबन्याक: यह भारत की मेरी पहली यात्रा है, और यह अनुभव बहुत सकारात्मक व प्रेरणादायक रहा. संयुक्त राष्ट्र स्वयंसेवक कार्यक्रम (UNV) के लिए भारत में बहुत सम्भावनाएँ हैं. यहाँ ऊर्जा से भरपूर युवा आबादी, विविध प्रतिभाएँ, स्वयंसेवा की मज़बूत परम्परा, डिजिटल नवाचार और समावेशी विकास के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखाई देती है.
यूएन न्यूज़: वर्ष 2026 को सतत विकास के लिए अन्तरराष्ट्रीय स्वयंसेवक वर्ष घोषित किया गया है. इस बार ऐसा क्या अलग किया जाना चाहिए, ताकि यह केवल उत्सव और दृश्यता तक सीमित नहीं रहे, बल्कि स्थाई प्रभाव भी छोड़े?
आन्द्रेई पोगरेबन्याक: वर्ष 2026 केवल उत्सव का वर्ष नहीं होना चाहिए; इससे वास्तविक बदलाव आना चाहिए. लक्ष्य सिर्फ़ स्वयंसेवा को अधिक दिखाई देने लायक बनाना नहीं, बल्कि उसे और मज़बूत करना और अधिक मान्यता दिलाना होना चाहिए.
इसके लिए तीन प्राथमिकताओं पर ध्यान देना ज़रूरी है.
पहली प्राथमिकता - हमें स्पष्ट रूप से दिखाना होगा कि यूएन स्वयंसेवक समुदायों की मदद किस तरह करते हैं और सतत विकास लक्ष्यों में उनका योगदान क्या है.
दूसरी प्राथमिकता - यूएन स्वयंसेवा को राष्ट्रीय विकास योजनाओं और संयुक्त राष्ट्र सहयोग ढाँचों में उचित समर्थन व निवेश के साथ शामिल किया जाना चाहिए.
तीसरी प्राथमिकता - वर्ष 2026 के अन्त तक ठोस बदलाव नज़र आने चाहिए - जैसेकि नई नीतियाँ, अधिक वित्तीय समर्थन, और यूएन स्वयंसेवकों के लिए बेहतर व्यवस्था.
भारत इस दिशा में पहले से ही अच्छा उदाहरण पेश कर रहा है. आदि युवा फ़ैलोशिप जैसे कार्यक्रम जनजातीय समुदायों के युवाओं को कौशल, आत्मविश्वास और अवसर हासिल करने में मदद कर रहे हैं.
सरल शब्दों में कहें तो वर्ष 2026 अगर बेहतर नीतियों, अधिक निवेश और स्वयंसेवकों के लिए मज़बूत समर्थन की दिशा में आगे बढ़ता है, तो यह एक स्थाई विरासत छोड़ सकता है.
यूएन न्यूज़: वैश्विक और एशिया-प्रशान्त दृष्टिकोण से, संयुक्त राष्ट्र स्वयंसेवक कार्यक्रम (UNV) सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में किस तरह संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की मदद कर रहा है, ख़ासतौर पर उन देशों में जो जटिल विकास और मानवीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं?
आन्द्रेई पोगरेबन्याक: संयुक्त राष्ट्र स्वयंसेवक कार्यक्रम के दो मुख्य दायित्व हैं. पहला, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के लिए प्रतिभाशाली स्वयंसेवकों को जुटाना. दूसरा, सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के एक सशक्त माध्यम के रूप में दुनिया भर में स्वयंसेवा को बढ़ावा देना.
वर्ष 2025 में, संयुक्त राष्ट्र स्वयंसेवक कार्यक्रम ने 172 देशों और क्षेत्रों में 60 से अधिक संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं के साथ 17 हज़ार 100 से अधिक राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्वयंसेवकों को जोड़ा. इन स्वयंसेवकों ने शान्ति, मानवीय सहायता और विकास से जुड़ी अनेक पहलों में सहयोग दिया.
यह कार्यबल समावेशन और विविधता के प्रति कार्यक्रम की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है. कुल स्वयंसेवकों में 60 प्रतिशत महिलाएँ थीं और 327 विकलांगजन थे.
एशिया और प्रशान्त क्षेत्र में ही, वर्ष 2025 में 3 हज़ार 100 से अधिक स्वयंसेवकों ने संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और साझीदारों के काम में योगदान दिया.
ये आँकड़े दिखाते हैं कि संयुक्त राष्ट्र स्वयंसेवक केवल अतिरिक्त सहयोग नहीं हैं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. वे विविध कौशल, स्थानीय समझ और समुदायों से मज़बूत जुड़ाव लेकर आते हैं, जिससे संयुक्त राष्ट्र ज़मीन पर अधिक प्रभावी ढंग से काम कर पाता है और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति तेज़ होती है.
यूएन न्यूज़: क्या आप कोई ऐसा उदाहरण बता सकते हैं, जहाँ स्वयंसेवा से समुदायों में मापने योग्य वास्तविक बदलाव आया हो?
आन्द्रेई पोगरेबन्याक: जी, बिल्कुल. चूँकि हम नई दिल्ली में हैं, मैं भारत का एक अच्छा उदाहरण देना चाहूँगा - आदि कर्मयोगी फ़ैलोशिप कार्यक्रम, जो भारत में यूएनएफ़पीए, यूएनवी और भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की साझेदारी में चलाया गया.
वर्ष 2025 में, 82 युवा स्वयंसेवकों को मध्य प्रदेश और राजस्थान के दूरदराज़ जनजातीय क्षेत्रों में तैनात किया गया. वे 1 हज़ार 100 से अधिक गाँवों में 40 हज़ार से ज़्यादा लोगों तक पहुँचे. उन्होंने परिवारों को स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास एवं आजीविका से जुड़ी सरकारी योजनाओं को समझने और उनका लाभ उठाने में मदद की.
असली बदलाव यह था कि कई परिवार उन सेवाओं और लाभों तक पहुँच पाए, जो उन्हें पहले नहीं मिल पा रहे थे - क्योंकि अब कोई उन्हें प्रक्रिया समझा रहे थे और सही मार्गदर्शन दे रहे थे.
स्वयंसेवकों ने किशोर-किशोरियों के साथ स्वास्थ्य जागरूकता पर भी काम किया और स्वास्थ्य शिविरों व सामुदायिक कार्यक्रमों में सहयोग दिया.
यह उदाहरण दिखाता है कि स्वयंसेवक केवल अतिरिक्त सहायता नहीं देते. वे सरकारी योजनाओं और उन समुदायों के बीच सेतु बनते हैं, जिन्हें इन सेवाओं की सबसे अधिक ज़रूरत होती है. दूरदराज़ क्षेत्रों में यह जुड़ाव सार्थक और स्थाई बदलाव ला सकता है.
यूएन न्यूज़: बहुत से युवा योगदान देना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम होता कि शुरुआत कहाँ से करें. जो व्यक्ति पहली बार स्थानीय स्तर पर या संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के ज़रिए स्वयंसेवा करना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सलाह देंगे?
आन्द्रेई पोगरेबन्याक: किसी भी युवा के लिए मेरी सलाह सरल है - पूरी तरह तैयार होने का इन्तज़ार नहीं करें, बस कहीं से भी शुरुआत करें.
शुरुआत में सब कुछ जानना ज़रूरी नहीं है. स्वयंसेवा अपनी रुचियों को समझने, आत्मविश्वास बढ़ाने और नए कौशल सीखने का एक अच्छा तरीक़ा है.
आप जहाँ हैं, वहीं से शुरू कर सकते हैं - किसी स्थानीय ग़ैर-सरकारी संगठन, सामुदायिक समूह, स्कूल, कॉलेज या अपने ही पड़ोस से.
स्वयंसेवा करते हुए धीरे-धीरे यह समझ में आने लगता है कि आपको किस काम से प्रेरणा मिलती है और आप किस तरह का प्रभाव डालना चाहते हैं.
जब आप अगला क़दम उठाने के लिए तैयार हों, तो यूएनवी व्यावहारिक अनुभव पाने, सार्थक काम में योगदान देने और एक वैश्विक नैटवर्क से जुड़ने का अवसर देता है.
इसलिए जिज्ञासा और मदद करने की इच्छा के साथ शुरुआत करें. हो सकता है कि आप किसी अन्य व्यक्ति या समुदाय के जीवन में बदलाव लाने के लिए निकलें, और इसी प्रक्रिया में अपना उद्देश्य भी खोज लें.