जलवायु कार्रवाई के लिए AI की सब के लिए सुलभता ज़रूरी - UNEP
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जलवायु कार्रवाई का रूप बदल सकती है - AI कार्बन उत्सर्जन को अधिक सटीकता से मापने और आपदाओं का पहले से अनुमान लगाने में मदद करती है. लेकिन इसके पूरे लाभ पाने के लिए ज़रूरी है कि डेटा मुक्त रहे, नवाचार सन्तुलित नियमों के साथ आगे बढ़ें और विकासशील देश पीछे नहीं छूटें.
यूएन न्यूज़ - हम जलवायु आपदा के दौर में हैं और AI तेज़ी से फैल रही है. एआई अवसंरचना के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर यूनेप कितना चिन्तित है?
मार्टिन क्रूस - एआई को जलवायु कार्रवाई के समाधान का हिस्सा माना जाना चाहिए, क्योंकि यह तात्कालिक जलवायु जोखिमों के बीच शमन और अनुकूलन को तेज़ करने में मदद कर सकता है.
हालाँकि कुछ चिन्ताएँ भी हैं. डेटा केन्द्र बहुत अधिक बिजली का उपयोग करते हैं – ख़ासतौर पर तब जब बिजली जीवाश्म ईंधन से आती हो. इन्हें ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की भी ज़रूरत होती है, जिससे स्थानीय जल संसाधनों पर दबाव पड़ सकता है.
ये मुख्य पर्यावरणीय जोखिम हैं, लेकिन कुल मिलाकर एआई को समस्या नहीं, बल्कि समाधान का हिस्सा माना जाना चाहिए.
यूएन न्यूज़ - अगर एआई समाधान का हिस्सा है, तो इससे किन क्षेत्रों में सबसे बड़ा अन्तर हो सकता है?
मार्टिन क्रूस - एआई, कार्बन उत्सर्जन की निगरानी को अधिक सटीक बनाकर और प्रारम्भिक चेतावनी प्रणालियों को मज़बूत करके, जलवायु कार्रवाई में बड़ी भूमिका निभा सकता है. यह शमन के लिए उपग्रह डेटा के विश्लेषण से पहचान सकता है कि मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसें कहाँ से रिस रही हैं, जैसे पाइपलाइन या रिफ़ाइनरी से. इससे ऐसे चेतावनी तंत्र सम्भव होते हैं जो रिसाव होने पर संचालकों को तुरन्त सूचना देते हैं ताकि वे जल्दी कार्रवाई कर सकें.
अनुकूलन के क्षेत्र में एआई मौसम और जलवायु पूर्वानुमान को अधिक सटीक बना रहा है और कई अतिरिक्त दिनों की अग्रिम चेतावनी दे रहा है. यह अतिरिक्त समय सम्वेदनशील हालात वाले समुदायों की रक्षा करने और आपदा जोखिम कम करने में मदद कर सकता है. ये उदाहरण दिखाते हैं कि एआई, जलवायु समाधान के लिए एक शक्तिशाली साधन बन सकता है.
यूएन न्यूज़ - क्या ऐसे छोटे एआई समाधान हैं जो पहले से लागू हैं और स्थानीय स्तर पर मापनीय प्रभाव दिखा रहे हैं?
मार्टिन क्रूस - व्यापक अर्थ में डिजिटल समाधान, जिन्हें हम एआई के रूप में समझते हैं, कई वर्षों से उपयोग में हैं, विशेषकर सम्वेदनशील हालात वाले समुदायों के साथ जलवायु अनुकूलन के काम में. अन्तर ये है कि ये उपकरण अब अधिक शक्तिशाली और व्यावहारिक हो गए हैं.
उदाहरण के लिए, पूर्वानुमान प्रणालियाँ अब महीनों पहले तक, मौसम के रुझानों का आकलन कर सकती हैं, जिससे किसानों को यह तय करने में मदद मिलती है कि कब बुवाई करें या यदि सूखा आने की आशंका हो तो सूखा-रोधी फ़सलें अपनाएँ. ऐसे कई उपकरण ज़मीनी स्तर पर पहले से काम कर रहे हैं. कुछ अभी पायलट चरण में हैं और इन्हें व्यापक स्तर पर लागू करने के प्रयास जारी हैं.
यूएन न्यूज़ - ऊर्जा दक्षता, जल उपयोग और उत्सर्जन रिपोर्टिंग जैसे क्षेत्रों में एआई के लिए किस तरह के पर्यावरणीय मानक या दिशा-निर्देश आवश्यक हैं?
मार्टिन क्रूस - इन क्षेत्रों में एआई का परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा है. नवोन्मेषक कम्पनियाँ, बड़ी कम्पनियाँ एवं संस्थान अलग-अलग गति से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि नियम और संस्थागत व्यवस्थाएँ अक्सर तकनीकी विकास से पीछे रह जाती हैं.
ज़रूरत यह नहीं है कि एआई को अत्यधिक नियमों से बाँध दिया जाए या नवाचार को हतोत्साहित किया जाए. बल्कि वैश्विक सम्वाद के माध्यम से सन्तुलित दिशा-निर्देश तय किए जाने चाहिए. यदि नियम बहुत ढीले हों, तो डेटा केन्द्रों की ऊर्जा खपत या जल उपयोग जैसे मुद्दों पर स्पष्ट मार्गदर्शन नहीं रहेगा. यदि नियम बहुत कठोर हों, तो नवाचार समय से पहले ही रुक सकता है. संयुक्त राष्ट्र, नीतियाँ निर्धारित नहीं करता, लेकिन वह सरकारों के साथ मिलकर सर्वोत्तम प्रथाएँ साझा करता है और ऐसे सन्तुलित दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है जो नवाचार व सतत विकास दोनों का समर्थन करे.
यूएन न्यूज़ - जलवायु के दृष्टिकोण से आपकी मुख्य अपेक्षाएँ क्या हैं, ख़ासतौर पर एआई नवाचार को जलवायु कार्रवाई के साथ जोड़ने के सन्दर्भ में?
मार्टिन क्रूस - जलवायु क्षेत्र में एआई से सबसे बड़ी उम्मीद यह है कि यह उत्सर्जन डेटा की सटीकता बढ़ाकर ग्रीनहाउस गैस सूचीकरण को मज़बूत कर सकता है, जिससे साफ़ पता चल सके कि कितना उत्सर्जन हो रहा है और कहाँ से. ऐसा मज़बूत डेटा आधार जलवायु विज्ञान पर भरोसा बनाने के लिए ज़रूरी है, और एआई डेटा संग्रह और विश्लेषण दोनों को बेहतर बनाता है.
दूसरा महत्वपूर्ण योगदान उन्नत डेटा प्रसंस्करण है. उदाहरण के लिए, भारत के कई शहरों में एआई का उपयोग विस्तृत गर्मी मानचित्रण के लिए किया जा रहा है, जिससे यह पहचानने में मदद मिलती है कि किन इलाक़ों पर अत्यधिक गर्मी का सबसे ज़्यादा असर पड़ता है, ताकि वहाँ लक्षित समाधान -जैसेकि निष्क्रिय शीतलन उपाय, प्रभावी ढंग से लागू किए जा सकें.
यूएन न्यूज़ - आपने अभी एआई सम्मेलन में जलवायु विषयक चर्चाओं में भाग लिया. यदि आपको एक वाक्य में अपना निष्कर्ष बताना हो, तो वह क्या होगा?
मार्टिन क्रूस - अभी हमें लम्बा रास्ता तय करना है, लेकिन वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों, विशेषकर जलवायु परिवर्तन से निपटने में एआई समाधान उपयोगी योगदान दे सकते हैं और हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
यूएन न्यूज़ - अगले पाँच वर्षों में जलवायु के लिए एआई आपको कैसी नज़र आती है.
मार्टिन क्रूस - मेरी उम्मीद यह होगी कि डेटा पर किसी एक संस्था या कम्पनी का एकाधिकार नहीं हो. डेटा मुक्त और सर्व सुलभ रहना चाहिए, ताकि उसका उपयोग सतत विकास, जलवायु कार्रवाई, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक प्रगति के लिए किया जा सके, जो सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप हो.
जो डेटा तैयार हो रहा है, संसाधित और विश्लेषित किया जा रहा है. यहाँ तक कि उन उपकरणों के माध्यम से भी जिन्हें हम रोज़ अपने फोन पर उपयोग करते हैं, उसे व्यापक रूप से उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि वह वैश्विक पर्यावरणीय व सामाजिक चुनौतियों से निपटने में मदद कर सके.