AI के लिए समावेशी, जवाबदेह और वैश्विक ढाँचा अनिवार्य, वोल्कर टर्क
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने आगाह किया है कि यदि तत्काल सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) असमानता बढ़ा सकती है, पक्षपात को बढ़ावा दे सकती है और दुनिया में वास्तविक जोखिम पैदा कर सकती है.
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit 2026' के दौरान यूएन न्यूज़ के साथ विशेष बातचीत में कहा कि मानवाधिकार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित विकास और उपयोग के लिए एक ज़रूरी ढाँचा प्रदान करते हैं.
उन्होंने कहा कि एआई का असर अन्ततः शक्ति और उसके इस्तेमाल से जुड़ा है, और इसके तेज़ विस्तार से असमानता, पक्षपात और भेदभाव जैसे बड़े मानवाधिकार जोखिम पैदा हो सकते हैं.
वोल्कर टर्क ने ज़ोर दिया कि एआई के डिज़ाइन, विकास और इस्तेमाल के हर चरण में मानवाधिकार प्रभाव का आकलन होना चाहिए और तकनीकी कम्पनियों को, संयुक्त राष्ट्र के व्यवसाय एवं मानवाधिकार सिद्धान्तों का पालन करना चाहिए.
उन्होंने चेतावनी दी कि मज़बूत नैतिक समझ के बिना एआई “फ्रेंकेंस्टाइन के राक्षस” जैसी बन सकती है, इसलिए इसे पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशन सुनिश्चित करने वाले ढाँचे के तहत संचालित करना ज़रूरी है.
(इंटरव्यू को स्पष्टता व संक्षिप्तता के लिए सम्पादित किया गया है.)
यूएन न्यूज़: आप कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सन्दर्भ में मानवाधिकारों को किस तरह देखते हैं?
वोल्कर टर्क: कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक तकनीकी उपकरण है. ऐसे उपकरणों को सुरक्षा नियमों के बिना विकसित नहीं किया जाना चाहिए. इन्हें जोखिम और सुरक्षा आकलन के आधार पर तैयार करना ज़रूरी है. मानवाधिकार, शक्ति पर नियंत्रण का काम करते हैं क्योंकि अन्ततः यह शक्ति का ही मामला है. तकनीक का उपयोग अच्छे और बुरे दोनों कामों के लिए हो सकता है. इसलिए ज़रूरी है कि एक स्पष्ट ढाँचा हो जिसके तहत एआई को विकसित, डिज़ाइन और इस्तेमाल किया जाए. इसी कारण एआई के ज़िम्मेदार उपयोग के लिए, मानवाधिकार बेहद महत्वपूर्ण हैं.
यूएन न्यूज़: AI के तेज़ी से होते विस्तार से मानवाधिकारों के लिए सबसे बड़े ख़तरे क्या हैं?
वोल्कर टर्क: असमानता एक बहुत बड़ा मुद्दा है, और मुझे ख़ुशी है कि यह एआई सम्मेलन भारत में हो रहा है. यह बहुत ज़रूरी है कि ये तकनीकें हर जगह विकसित हों और हर जगह इस्तेमाल हों, न कि केवल कुछ स्थानों तक सीमित रहें.
इसके अलावा पक्षपात और भेदभाव का ख़तरा भी है. अगर डेटा केवल दुनिया के एक हिस्से से लिया जाए, या यदि केवल पुरुष ही एआई विकसित कर रहे हों, तो पक्षपात, अनजाने में प्रणालियों में शामिल हो सकता है. हमारा मानना है कि कमज़ोर वर्गों और अल्पसंख्यकों का ध्यान रखा जाना ज़रूरी है, क्योंकि वे अक्सर एआई विकास से बाहर रह जाते हैं. यह सार्थक भागेदारी और बेहतर दुनिया की सोच से जुड़ा मामला है. मानवाधिकार वही दृष्टि प्रदान करते हैं.
यूएन न्यूज़: एक आम धारणा यह है कि जब हम मानवाधिकारों की बात करते हैं, तो वैश्विक दक्षिण के देशों बनाम पश्चिमी देशों के संदर्भ में दोहरे मापदंड अपनाए जाते हैं. इस पर आपका क्या विचार है?
वोल्कर टर्क: दुर्भाग्य से दोहरे मापदंड हर जगह मौजूद होते हैं. कभी-कभी यह धारणा, देखने वाले के नज़रिए पर भी निर्भर करती है. मानवाधिकारों का मूल सिद्धान्त यह है कि सभी लोग जन्म से स्वतंत्र और समान अधिकारों वाले हैं. यह सिद्धान्त हर व्यक्ति और हर जगह पर लागू होता है.
हालाँकि, इसका पालन हमेशा समान रूप से नहीं होता. दुनिया में साठ से अधिक संघर्ष चल रहे हैं, लेकिन अक्सर हम केवल कुछ ही के बारे में सुनते हैं. कई संकट नज़रअन्दाज़ हो जाते हैं और इसी से दोहरे मापदंड की धारणा बनती है. संयुक्त राष्ट्र के लिए ज़रूरी है कि इस सिद्धान्त को दुनिया के हर हिस्से में समान रूप से लागू किया जाए. मेरा कार्यालय कैरिबियन, सूडान और म्याँमार सहित सभी क्षेत्रों की स्थितियों पर बयान जारी करता है. हम कोई अपवाद नहीं करते.
यूएन न्यूज़: जैनरेटिव एआई, नियमों की तुलना में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. सरकारों और कम्पनियों को तुरन्त कौन से सुरक्षा उपाय लागू करने चाहिए?
वोल्कर टर्क: दवा उद्योग का उदाहरण लें. वहाँ किसी नए उत्पाद को बाज़ार में लाने से पहले लम्बे समय तक परीक्षण होते हैं ताकि उससे जुड़े सभी जोखिम पहचाने जा सकें.
एआई के मामले में कम्पनियों से यह मांग करनी होगी कि वे एआई उपकरणों को डिज़ाइन करने, लागू करने और बाज़ार में लाने से पहले मानवाधिकार प्रभाव का आकलन करें.
हम काफ़ी समय से देख रहे हैं कि कुछ कम्पनियों के बजट कुछ छोटे देशों से भी बड़े हैं. अगर आप तकनीक पर केवल अपने देश में नहीं, बल्कि दुनिया भर में नियंत्रण रखते हैं, तो आप शक्ति का इस्तेमाल कर रहे होते हैं. इस शक्ति का उपयोग अच्छे कामों के लिए किया जा सकता है, जैसेकि स्वास्थ्य, शिक्षा और सतत विकास में मदद करना. लेकिन इसका इस्तेमाल बुरे कामों के लिए भी हो सकता है, जैसे स्वचालित घातक हथियार, ग़लत सूचना, घृणा और हिंसक महिला-विरोधी सामग्री का प्रसार.
यूएन न्यूज़: आपने तकनीकी कम्पनियों की बढ़ती ताक़त को लेकर, पहले भी चिन्ता जताई है. एआई कम्पनियों पर ठोस तौर पर कौन-सी ज़िम्मेदारियाँ होनी चाहिए?
वोल्कर टर्क: हम पारम्परिक तौर पर शक्ति की बात देशों के संदर्भ में करते हैं, और यह सही भी है. इसलिए शक्ति के संदर्भ में मानवाधिकार, एक नियंत्रण और सुरक्षा ढाँचे की तरह काम करते हैं, ताकि प्रभुत्व, दमन और दुरुपयोग से बचा जा सके तथा शक्ति का उपयोग सकारात्मक उद्देश्यों के लिए हो. मानवाधिकार हमारे जीवन, आपसी सम्बन्धों, संस्थाओं और पर्यावरण से जुड़े हैं. इस अर्थ में यह एक म़जबूत शासन ढाँचा देते हैं, जिससे कम्पनियाँ अपनी ज़िम्मेदारियों को समझें और उनका पालन करें. व्यवसाय और मानवाधिकार पर संयुक्त राष्ट्र की घोषणा, इसी दिशा में महत्वपूर्ण है, विशेषकर बड़ी टैक कम्पनियों के लिए.
यूएन न्यूज़: एआई में पक्षपात और असमानता को बढ़ने से रोकने के लिए किस तरह के नियम या शासन की ज़रूरत है?
वोल्कर टर्क: मुझे ऐसे लोगों से बात करने का मौक़ा मिला है जो इन तकनीकों को बनाते और तैयार करते हैं. मुझे अक्सर लगता है कि उन्हें विकास चरण में जाते समय बुनियादी सिद्धान्तों की बहुत सतही समझ होती है.
यह मुझे कुछ हद तक 'फ्रेंकेंस्टाइन के राक्षस' की याद दिलाता है - आप ऐसी चीज़ बना देते हैं जिस पर आपका नियंत्रण नहीं रहता. बिना समझ के बनाई गई तकनीक “जिन्न को बोतल से बाहर छोड़ने” जैसी हो सकती है.
अगर आप जोखिमों और ख़तरों के प्रति सतर्क नहीं हैं, तो भारी नुक़सान हो सकता है. हमने म्याँमार में इसका उदाहरण देखा, जहाँ सोशल मीडिया मंच पर रोहिंग्या समुदाय के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर नफ़रत भरे सन्देश फैलाए गए.
बहुत ज़रूरी है कि समाज के हर वर्ग, ख़ासतौर पर महिलाओं और युवाओं, की भागेदारी सुनिश्चित की जाए और यह समझा जाए कि लोगों की सोच व मानसिक विकास अलग-अलग होते हैं.
हमें ऐसी तकनीक नहीं बनानी चाहिए जो लोगों को लत लगा दे और उनके मन और आत्मा को प्रभावित करे. साथ ही यह भी समझना ज़रूरी है कि ग़लत सूचना, समाज की एकता को तोड़ती है और लोगों को अलग-अलग वर्गों या सम्प्रदायों में बाँट देती है.
हम ऑनलाइन महिला-विरोधी सामग्री की बढ़ती समस्या भी देख रहे हैं. कई महिला राजनेताओं ने मुझसे कहा है कि वे, सोशल मीडिया पर अपने कड़वे अनुभवों के कारण, राजनीति छोड़ने के बारे में सोच रही हैं.
यूएन न्यूज़: एआई जिस गति से बढ़ रही है, उसके बीच संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में सुरक्षा नियम कितनी जल्दी लागू हो सकते हैं और कब तक ठोस नतीजे आ सकते हैं?
वोल्कर टर्क: संयुक्त राष्ट्र ने सूचना की विश्वसनीयता पर बहुत मज़बूत काम किया है, क्योंकि सच तक पहुँच का अधिकार भी ज़रूरी है. अगर समाज में तथ्य पर सहमति न हो, तो सामाजिक सहमति टूट सकती है. विज्ञान तक पहुँच का अधिकार भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज भी कुछ लोग जलवायु परिवर्तन जैसे स्थापित वैज्ञानिक तथ्यों से इनकार करते हैं, जबकि प्रमाण स्पष्ट हैं.
संयुक्त राष्ट्र यह सुनिश्चित करता रहेगा कि कम्पनियों की ज़िम्मेदारी और जवाबदेही पर ज़ोर दिया जाए और एआई सहित, तकनीक के लिए वैश्विक मानक विकसित किए जाएँ. ग़लत सूचना, सूचना की सत्यता और जवाबदेही पर काफ़ी काम चल रहा है. अगर ग़लत सूचना से घृणात्मक भाषण या हिंसक घटनाएँ होती हैं और मंच कार्रवाई नहीं करते, तो आपराधिक ज़िम्मेदारी भी तय हो सकती है. ऐसे मामलों में सवाल उठता है कि यदि मानवाधिकार - मानकों के अनुरूप सामग्री नियंत्रण नहीं किया गया, तो ज़िम्मेदारी किसकी होगी, क्योंकि इससे हिंसा, अपराध और घृणा अपराध बढ़ सकते हैं.
यूएन न्यूज़: आपके अनुसार पाँच साल बाद ज़िम्मेदार एआई कैसी नज़र आएगी?
वोल्कर टर्क: मुझे उम्मीद है कि एआई का विकास समावेशी होगा, जहाँ शक्ति कुछ ही कम्पनियों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि दुनिया भर में फैले, और इसका विकास हर समाज की विविधता एवं समृद्धि पर आधारित हो.
मैं ऐसे समावेशी, सार्थक और भागेदारी वाले विकास की आशा करता हूँ जो आज की बड़ी चुनौतियों को हल करने में मदद करे. जलवायु संकट, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच और सभी के लिए शिक्षा जैसे लक्ष्यों को हासिल करने में एआई एक बेहद उपयोगी साधन बन सकती है.
लेकिन दूसरी तरफ़ ख़तरा यह है कि अगर हम बेहतर दुनिया की स्पष्ट दृष्टि के साथ आगे नहीं बढ़े, तो समाज और अधिक ध्रुवीकृत हो सकते हैं, और ऐसे युद्ध भी हो सकते हैं जो इनसानों के नियंत्रण में न हों. ऐसी स्थिति बहुत ख़तरनाक होगी.