2 जून 2022

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने, 24 फ़रवरी 2022 को यूक्रेन पर रूसी हमला शुरू होने के बाद, अमीन अवाद को फ़रवरी में ही यूक्रेन के लिये संकट संयोजक नियुक्त किया था. यूक्रेन युद्ध के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर, यूएन न्यूज़ ने अमीन अवाद से विशेष बातचीत की है जिसमें उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र, युद्ध रोकने के लिये क्या कर रहा है और यूक्रेन के लाखों प्रभावित लोगों की मदद किस तरह की जा रही है. इनमें कुछ ही महीनों के भीतर शुरू होने वाले कड़ी सर्दियों के मौसम में लोगों की मदद करने के प्रयास भी शामिल हैं...

यूएन न्यूज़: यूक्रेन में रूसी युद्ध, एक दुखद मोड़ पर पहुँच गया है यानि युद्ध शुरू होने के 100 दिन पूरे होना. क्या इस युद्ध के निकट भविष्य में समाप्त होने की कोई उम्मीदें नज़र आ रही हैं?

अमीन अवाद: ये उम्मीद तो है कि युद्ध ख़त्म होगा. ये युद्ध रूस और युक्रेन दोनों के लिये ही हानिकारक है. रूस पर लगे प्रतिबन्ध गम्भीर हैं, लोगों की ज़िन्दगियों का नुक़सान, अस्पतालों, स्कूलों, घरों, रेलवे स्टेशनों, रेल पटरियों, परिवहन सैक्टर की तबाही-बर्बादी, और ये सब कुछ दुनिया के लिये वास्तव में विनाशकारी है. ये एक ऐसा देश हे जो दुनिया की खाद्य ज़रूरतों का लगभग 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा पूरा करने में सहायता करता है. यह देश, हर साल लगभग साढ़े आठ करोड़ टन खाद्य सामग्रियों का उत्पादन करता है जोकि अब युद्ध में फँस गया है. अगला फ़सल मौसम भी नज़दीक है, मगर फ़सल उपज का निर्यात नहीं किया जा सकता. ध्यान रहे कि ये दोनों देश मिलकर, दनिया की लगभग 30 प्रतिशत खाद्य ज़रूरतें पूरी करते हैं.

यूएन न्यूज़: यह युद्ध ख़त्म कराने की ख़ातिर दोनों देशों को एक साथ लाने के लिये, इस समय संयुक्त राष्ट्र क्या कर रहा है.

अमीन अवाद: जैसाकि हम सभी जानते हैं, यूएन महासचिव ये स्पष्ट रूप से कह चुके हैं. ये एक पागलपन भरा युद्ध है. ये इस तरह से जारी नहीं रह सकता है. ये कोई स्थानीय युद्ध नहीं है. इसके प्रभाव दुनिया भर में देखे जा रहे हैं – पूरब और पश्चिम सभी में. समय के इस दौर में इस तरह का युद्ध बहुत ख़तरनाक है, और जैसाकि मैं पहले कह चुका हूँ, युद्ध का लोगों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है. इस युद्ध के कारण अकाल पड़ने का जोखिम है, इसके कारण लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है, जैसाकि हमने इतिहास में कभी नहीं देखा. तो इस युद्ध को रोका जाना होगा. ये किसी के भी हित में नहीं है. दुनिया को और ज़्यादा चुनौतियों की ज़रूरत नहीं है. 

यूक्रेन के एक इलाक़े में, संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता एजेंसियों से राहत सामग्री का वितरण
UNOCHA/Ivane Bochorishvili
यूक्रेन के एक इलाक़े में, संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता एजेंसियों से राहत सामग्री का वितरण

यूएन न्यूज़: निसन्देह आम लोगों को इस युद्ध की सबसे भारी क़ीमत चुकानी पड़ रही है. बहुत से लोग मारे गए हैं और लाखों लोगों को पड़ोसी देशों में शरण लेनी पड़ी है. अब भी देश में रहने वाले लोगों की क्या स्थिति है?

अमीन अवाद: ये एक हताशा भरा विस्थापन है. देश के भीतर ही लगभग 80 लाख लोग विस्थापित हैं. अन्य 60 लाख लोगों को पड़ोसी देशों में जाना पड़ा है. ये संख्या कुल मिलाकर लगभग डेढ़ करोड़ है. देश में लगभग डेढ़ करोड़ अन्य लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने मूल स्थान व घर नहीं छोड़े हैं, मगर उन पर भी व्यापक प्रभाव पड़ा है, क्योंकि वो अपने खेतों तक नहीं जा सके. उनके कामकाज व आजीविकाएँ ख़त्म हो गए हैं. शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं व सेवाओं तक उनकी पहुँच ख़त्म हो गई है. लाखों बच्चे ऐसे हैं जो स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. इस तरह ये एक बहुत ही भावनात्मक परिस्थिति है. लोगों की आमदनियाँ ख़त्म हो गई हैं, एक तरफ़ तो बहुत से लोग विस्थापित हुए हैं, मगर दूसरी तरफ़ जो लोग अपने स्थानों से नहीं हटे, उनके पास कामकाज और आमदनियाँ नहीं हैं. सामाजिक संरक्षा व्यवस्था पर बहुत भारी बोझ है. मानवीय सहायता समुदाय के संसाधनों पर बोझ भी चरम पर है. सरकारी सेवाओं पर भी भारी बोझ है, इस तरह ये एक बहुत बुरी स्थिति है.

यूएन न्यूज़: संयुक्त राष्ट्र और रैडक्रॉस (ICRC) ने यूक्रेन के बन्दरगाह शहर मारियुपोल के अज़ोवस्तल स्टील प्लाण्ट में फँसे हताश आम लोगों को बाहर निकालने में मदद की थी. क्या संयुक्त राष्ट्र अब भी किन्हीं ख़तरनाक स्थानों में फँसे लोगों को बाहर निकालने के लिये कोई अभियान चला रहा है?

अमीन अवाद: हमें मारियुपोल की तरह लोगों को बाहर निकालने के कोई अनुरोध नहीं मिले हैं, मगर हम ऐसे स्थानों तक पहुँचने के अनुरोध करते रहे हैं जहाँ की आबादियों को खाद्य व चिकित्सा सामग्रियों के साथ-साथ अन्य तरह की मदद की ज़रूरत है.

उससे भी ज़्यादा, अब हमें देश में सबसे ज़्यादा सर्दियों के मौसम बारे में सोचना होगा. सर्दियाँ नज़दीक हैं. हम पहले ही जून में पहुँच चुके हैं, दुनिया के इस हिस्से में सर्दियाँ सितम्बर में शुरू हो जाती हैं. तापमान शून्य से भी बहुत नीचे चला जाता है. और जबकि बहुत से बिजली संयंत्र, ऊर्जा केन्द्र, ईंधन व वैकल्पिक ऊर्जा आपूर्ति वाले ठिकाने तबाह हो चुके हैं, तो हमें आने वाली सर्दियों में लाखों लोगों को सही-सलामत रखने के लिये एक रणनैतिक रोडमैप, बहुत जल्द बनाना होगा.

यूक्रेन के मारियुपोल इलाक़े से आम लोग, सुरक्षा के लिये निकलते हुए जिस अभियान का प्रबन्ध, संयुक्त राष्ट्र ने किया.
© UNOCHA/Kateryna Klochko
यूक्रेन के मारियुपोल इलाक़े से आम लोग, सुरक्षा के लिये निकलते हुए जिस अभियान का प्रबन्ध, संयुक्त राष्ट्र ने किया.

यूएन न्यूज़: आप यूक्रेन में कुछ समय रहकर हालात ख़ुद देख चुके हैं और आपने युद्ध का कुरूप चेहरा भी देखा है. क्या आपको किसी ऐसे इनसान की कहानी याद है जिसने आपको गहराई से छुआ हो?

अमीन अवाद: इनसानी आपबीतियाँ! हर तरफ़ बहुत तकलीफें और तबाही नज़र आती है. ऐसे दृश्य हर जगह देखे जा सकते हैं, और इतनी सारी आपबीतियाँ जो एक दूसरे के साथ होड़ में हैं, मगर मेरा ख़याल है कि तबाही वाले इलाक़ों से गुज़रते हुए जो दृश्य मुझे सबसे ज़्यादा छूते हैं वो हैं, कि जब बच्चे अपने घरों या इमारतों से बाहर निकलकर ध्वस्त इमारतों व मलबों में खेलते हैं, तो वो सड़कों व रास्तों पर ख़ुद को अकेले पाते हैं, क्योंकि उनके माता-पिता या अभिभावक वहाँ नहीं होते हैं, और उन बच्चों को ये मालूम नहीं होता कि उन्हें कहाँ जाना है. ये बहुत दिल दहला देने वाला माहौल है, और युद्ध का एक कुरूप चेहरा भी, इसलिये ये युद्ध तुरन्त रुकना चाहिये.

यूएन न्यूज़: ज़पोरिझझिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सुरक्षा के बारे में चिन्ताएँ व्याप्त रही हैं. क्या संयुक्त राष्ट्र किसी तरह के जोखिमों का सामना करने के लिये किन्हीं साझीदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है?

अमीन अवाद: संयुक्त राष्ट्र की परमाणु ऊर्जा एजेंसी, अनेक बार यहाँ आ चुकी है, यूएन महासचिव यहाँ का दौरा कर चुके हैं. तीन बार रूस और यूक्रेन का भी दौरा किया गया है. एजेंसी के प्रतिनिधि सभी संयंत्रों पर गए. आपने जिस संयंत्र का नाम लिया, वो रूस के नियंत्रण में है. मेरा ख़याल है कि यूएन एजेंसी, इस संयंत्र तक पहुँचने के लिये बातचीत कर रही है. ये बहुत ही जोखिम भरा मामला रहा है. निसन्देह ये संयंत्र शान्तिपूर्ण उद्देश्यों के लिये संचालित होते हैं, मगर ये नहीं भूलना चाहिये कि वो परमाणु ऊर्जा से संचालित होते हैं, इसलिये अगर ये ख़तरनाक साबित होते हैं तो उससे केवल यूक्रेन का ही नुक़सान नहीं होगा, व्यापक क्षेत्र में विनाश होगा. इसलिये अत्यन्त सावधानी, सुरक्षा प्रक्रिया और प्रोटोकॉल का पालन किया जाना होगा.

यूएन न्यूज़: यूक्रेन में स्कूलों पर अनेक हमले हुए हैं. आपने युद्धरत पक्षों से आम लोगों व सिविल ढाँचे को तबाह नहीं करने का आग्रह किया है और ज़ोर दिया है कि अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के तहत इन ज़िम्मेदारियों में कोताही स्वीकार नहीं की जा सकती. क्या ऐसे कोई संकेत हैं कि रूस इन पुकारों को सुन रहा है?

अमीन अवाद: हम रूस से लगातार आग्रह करते रहे हैं कि वो सिविल ढाँचे को नुक़सान ना पहुँचाए, जिसमें पानी के स्रोत, बिजली, स्कूल और अस्पताल शामिल हैं, और हम ये पुकार लगाना जारी रखेंगे क्योंकि जिन लोगों को सुरक्षा की ख़ातिर भागना पड़ा है वो बहुत व्यापक पैमाने पर नकारात्मक रूप में प्रभावित हुए हैं क्योंकि ये हमले बहुत बड़े हैं और अस्वीकार्य भी हैं.

यूक्रेन के चेरनिहीफ़ में एक स्कूल अध्यापिका, हवाई बमबारी में स्कूल को हुई क्षति का निरीक्षण करते हुए.
© UNICEF/Ashley Gilbertson VII Photo
यूक्रेन के चेरनिहीफ़ में एक स्कूल अध्यापिका, हवाई बमबारी में स्कूल को हुई क्षति का निरीक्षण करते हुए.

यूएन न्यूज़: यूक्रेन, रूस पर भारी मात्रा में अनाज चुराने और कृषि ढाँचे को तबाह करने के आरोप लगाता रहा है. क्या संयुक्त राष्ट्र इन आरोपों की पुष्टि या जाँच कर पाया है?

अमीन अवाद: रूस ने अगर कोई कृषि उत्पाद चुराए हैं तो हम उसकी पुष्टि नहीं कर सके हैं. ये देश काफ़ी बड़ा है. लाखों एकड़ भूमि कृषि के लिये प्रयोग होती है और हम इस कृषि भूमि तक नहीं पहुँच सकते, जहाँ कोई लोग भी नहीं रह रहे हैं. युद्ध दरअसल वहाँ नहीं हो रहा है. रूस ने यूक्रेन के पूर्वी इलाक़े में जहाँ गलियारा खोला तो वहाँ से होकर काफ़ी लोग रूस में पहुँचे हैं जिनमें बच्चे भी थे. जहाँ तक इन आरोपों का सवाल है कि कुछ बच्चों को उनके माता-पिता से अलग किया गया है, तो इन आरोपों की जाँच-पड़ताल की जा रही है.

यूएन न्यूज़: क्या आपका कोई अन्य सन्देश है?

अमीन अवाद: मैं ये भी कहना चाहूँगा कि युद्ध तुरन्त रोकना होगा. युद्ध रुकने से दुनिया को बहुत फ़ायदा होगा. इस युद्ध के कारण दुनिया एक अच्छा स्थान नहीं है क्योंकि अकाल नज़दीक नज़र आ रहा है, आपूर्ति बाधित होने के कारण महंगाई बढ़ रही है, और सबसे ज़्यादा ये कि अनेक देशों में अस्थिरता उत्पन्न हो रही है. हम लगभग 69 देशों की बात कर रहे हैं जहाँ इन क़िल्लतों का बुरा और व्यापक असर पड़ सकता है. विश्व पहले ही अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है. उनमें से एक है जलवायु परिवर्तन, जो कृषि व आजीविकाओं के अन्य स्रोतों को प्रभावित कर रहा है. इसलिये हम जिस नज़र से भी देखें – रणनैतिक, राजनैतिक और आर्थिक दृष्टि से, युद्ध एक बड़ी बुराई है. जैसाकि यूएन महासचिव भी कह चुके हैं युद्ध के नुक़सान की भरपाई करने में अनेक साल लग जाते हैं. सैनिक, युवजन और महिलाएँ अग्रिम मोर्चों पर मारे जा रहे हैं. हमें इस युद्ध के फ़ायदों और नुक़सानों को मापना होगा, निसन्देह नुक़सान ही बड़े हैं. युद्ध से कोई लाभ नहीं होते हैं. हर किसी का नुक़सान ही होता है.

इस इण्टरव्यू के मसौदे को स्पष्टता व संक्षिप्तता के लिये सम्पादित किया गया है.

 

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