14 सितम्बर 2020

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र के अध्यक्ष चुने गए तुर्की के राजनयिक वोल्कान बोज़किर ऐसे अभूतपूर्व समय में यह ज़िम्मेदारी उठा रहे हैं, जब संगठन अप्रत्याशित महामारी से जूझ रहा है और उसके भविष्य की दिशा को लेकर अनेक भी सवाल मुँह-बाएँ खड़े हैं. 

वोल्कान बोज़किर काफ़ी अनुभवी जनसेवक हैं और हाल ही में यूरोपीय मामलों के मन्त्री रहे हैं. जनसेवा और राजनयिक सेवा में उन्हें लगभग 50 वर्षों का पेशेवर अनुभव है. पश्चिमी योरोपीय और अन्य (WEOG) राष्ट्रों के समूह ने मिलकर उन्हें महासभा के 75वें सत्र का अध्यक्ष चुना गया है. 

यूएन महासभा के 74वें सत्र की अध्यक्षता नाइजीरिया के तिजानी मोहम्मद बाँडे ने की थी. 

वोल्कान बोज़किर 1972 में तुर्की की विदेश सेवा में शामिल हुए और अनेक वरिष्ठ राजनयिक पदों पर रहे, जिनमें न्यूयॉर्क में महावाणिज्यदूत, बुख़ारेस्ट में राजदूत और योरोपीय संघ में तुर्की के स्थायी प्रतिनिधि के पद शामिल हैं.

वोल्कान बोज़किर ने 75वें सत्र से पहले यूएन न्यूज़ के साथ बातचीत में बताया कि आने वाले दशकों में संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिये उनकी क्या योजनाएँ हैं, अपने कार्यकाल के दौरान कमज़ोर तबके और समुदायों के संरक्षण को एक महत्वपूर्ण मुद्दा क्यों बनाएँगे, और कोविड-19 महामारी द्वारा उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिये उनकी क्या रणनीति रहेगी.

साक्षात्कार के अंश...

महासभा अध्यक्ष: बेशक, कोविड-19 से मुक़ाबला करना एक बड़ी प्राथमिकता बन गया है. यही कारण है कि मैंने यूएन के 75वें सत्र के लिये ये विषय अपनाया. सदस्य देशों ने यह विषय चुना था: "जो भविष्य हम चाहते हैं, जैसा संयुक्त राष्ट्र हमें चाहिये: बहुपक्षवाद के लिये हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि." मैंने इसमें यह और जोड़ दिया, "प्रभावी बहुपक्षीय कार्रवाई के माध्यम से कोविड-19 का सामना किया जाए,"  क्योंकि महामारी हमारी संस्थानों की मूलभूत संरचना को चुनौती दे रही है: हमारा कर्तव्य है कि हम इस वायरस को ख़त्म करने के लिये वैश्विक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई करें, जो हमारी अर्थव्यवस्थाओं और समाजों पर तबाही मचा रहा है.

यूएन न्यूज़: इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र की स्थापना को 75 साल हो जाएँगे. सत्र के दौरान महासभा के अध्यक्ष के रूप में इस वर्षगाँठ के आपके लिए क्या मायने हैं?

महासभा अध्यक्ष: कोविड-19 एक वैश्विक संकट है, जैसा, विश्व युद्ध की राख से जन्में संयुक्त राष्ट्र ने पहले कभी नहीं देखा. यह न केवल एक स्वास्थ्य संकट है, बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक संकट भी है. इससे संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा चुनौतियाँ बढ़ गई हैं,  जिन्हें सतत विकास लक्ष्यों और सतत विकास के लिये 2030 एजेंडा के माध्यम से दूर करने की कोशिश की जा रही थीं. 

इस लड़ाई में पूरी मानवता एक साथ खड़ी है. यह एकता का समय है. सदस्य देशों के पास जन-कल्याण की ख़ातिर मिलकर काम करने के लिये इससे बेहतर वजह नहीं हो सकती. मैं विश्वस्त हूँ कि हम, एकसाथ मिलकर इस संकट से और ज़्यादा मज़बूत होकर उबरेंगे.

इन सभी प्रयासों में संयुक्त राष्ट्र की, विशेष रूप से, महासभा की केन्द्रीय भूमिका है. इस संगठन के ज़रिये, सदस्य देश मानदण्ड निर्धारित करते हैं और आम चुनौतियों के समाधान के लिये सामूहिक संसाधन जुटाते हैं. टीकाकरण इसी का एक उदाहरण है. क्या कोविड की वैक्सीन वैश्विक स्तर पर समान रूप से साझा की जाएगी? यह एक ऐसी बीमारी है जो राष्ट्रीय सीमाओं को नहीं पहचानती. हम में से कोई भी तब तक सुरक्षित नहीं होंगे, जब तक सभी सुरक्षित न हो जाएँ. 

यूएन न्यूज़: संयुक्त राष्ट्र में सुधारों पर आपके क्या विचार हैं? यूएन और महासभा अगले 75 वर्षों के दौरान किस तरह से प्रासंगिक रह सकते हैं?

महासभा अध्यक्ष: यह ऐतिहासिक वर्षगाँठ, एक अनूठा अवसर है पीछे मुड़कर अपनी उपलब्धियों को देखने का, और उनसे सबक लेकर वर्तमान में बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने का.

उद्देश्य पूरा करने और प्रासंगिकता बनाए रखने के लिये संस्थानों को अपने-आप में समायोजन और सुधार लाने की आवश्यकता है. संयुक्त राष्ट्र में सुधारों के एजेण्डे और शान्ति व सुरक्षा, विकास व प्रबन्धन के क्षेत्रों में जो व्यापक बदलाव हमने देखे, मैं उन सभी का समर्थन करता हूँ. संयुक्त राष्ट्र परिवार को अधिक एकजुट और सुसंगत बनाने के लिए ये क़दम बेहद महत्वपूर्ण हैं.

संयुक्त राष्ट्र, आज तक, सार्वभौमिक सदस्यता वाला एकमात्र अन्तरराष्ट्रीय संगठन है जो बहुपक्षवाद के ज़रिये वैश्विक समस्याओं से निपटने के लिये मानदण्ड स्थापित करता है. महासभा संयुक्त राष्ट्र का एकमात्र अंग है, जहाँ सभी सदस्य देशों को अपनी आवाज़ उठाने का समान अधिकार है.

यूएन न्यूज़: आपने कमज़ोर लोगों और समूहों को अपनी कार्यवाही का केन्द्र क्यों बनाया है?

महासभा अध्यक्ष: वैश्विक चुनौतियाँ और संकट सबसे कमज़ोर व्यक्तियों और देशों पर सबसे बुरा असर डालते हैं. वंचित समूहों या उत्पीड़न के शिकार लोगों को यह विश्वास दिलाना ज़रूरी है कि संयुक्त राष्ट्र के सबसे लोकतान्त्रिक निकाय में उनकी परेशानियाँ सुनी जा रही हैं. मैं विश्व के सभी लोगों की आवाज़ को हमारी चर्चाओं में शामिल करने की दिशा में काम करूँगा. 

UN Photo/Manuel Elias
तुर्की के राजदूत वोल्कान बोज़किर और यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के बीच जनवरी 2020 में हुई एक मुलाक़ात

यूएन न्यूज़: वर्ष 2020 महिलाओं के अधिकारों के लिये एक महत्वपूर्ण वर्ष है. हम कार्रवाई के लिये बीजिंग घोषणा व मंच की 25वीं वर्षगाँठ और महिला, शान्ति व सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प की 20वीं वर्षगाँठ भी मना रहे हैं. महिलाओं और लड़कियों का सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिये आप क्या कार्रवाई करेंगे?

महासभा अध्यक्ष: सबूतों से पता चलता है कि लैंगिक समानता से शान्ति और समृद्धि के हालात बेहतर होते हैं. महिलाओं को अक्सर सभ्य काम, समान वेतन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल की उपलब्धता कम होती है. वे हिंसा और भेदभाव से पीड़ित होती हैं और अक्सर राजनैतिक व आर्थिक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनका प्रतिनिधित्व कम रहता है. दुर्भाग्य से, कोविड-19 महामारी के प्रसार के साथ ही, पिछले दशकों में हुई प्रगति के पलट जाने का ख़तरा पैदा हो गया है. इसे बदलना होगा.

महिलाओं के जीवन में सुधार हमारे समाजों को अधिक समावेशी और उत्पादक बनाता है, जिससे सभी को मदद मिलती है. मानक तय करने वाले एक प्रमुख अन्तरराष्ट्रीय संस्थान के रूप में, ‘उदाहरण द्वारा नेतृत्व करने’ की एक विशेष ज़िम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र के कंधों पर है.

अपनी टीम बनाते समय, मैंने अपने स्तर पर, लैंगिक समानता पर विशेष ध्यान दिया है, जिसमें अब पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाएँ शामिल हैं और वरिष्ठ प्रबन्धन में भी लैंगिक समानता है. मैं यह सुनिश्चित करूँगा कि शान्ति और सुरक्षा, मानवाधिकारों, मानवीय मुद्दों और सतत विकास के लिये काम करते समय लैंगिक समानता का ध्यान रखा जाए. 

यूएन न्यूज़: व्यक्तिगत स्तर पर, आपकी सार्वजनिक सेवा में रुचि कैसे हुई? आपको किन चीज़ों या बातों से प्रेरणा मिलती है?

महासभा अध्यक्ष: एक राजनयिक और राजनीतिज्ञ के रूप में लगभग 50 वर्षों के अपने करियर में, मेरा पूरा जीवन सार्वजनिक सेवा में बीता है. अपने देश और अपने राष्ट्र की सेवा करना मेरे लिये गर्व का विषय था.

अब मैं एक नया और उतना ही गौरवान्वित करने वाला अध्याय शुरू कर रहा हूँ, जहाँ मुझे संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्यों की सेवा करने का मौक़ा मिलेगा. इस नई चुनौतीपूर्ण भूमिका के लिये मेरी प्रेरणा है - बहुपक्षीय कूटनीति की प्रभावशीलता में मेरा दृढ़ विश्वास - और मानवता के समग्र कल्याण के लिये इतिहास के प्रवाह में छोटा ही सही, लेकिन एक अहम योगदान देने की इच्छा. इसके लिये, मेरी नज़र में, संयुक्त राष्ट्र से बेहतर कोई और जगह नहीं हो सकती.

 

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