वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

रोहिंग्या शरणार्थी संकट

म्याँमार में, हालात बेहद असुरक्षित होने के कारण, हज़ारों रोहिंज्या लोग देश से बाहर निकल गए हैं.
© UNICEF/Maria Spiridonova

म्याँमार के रोहिंग्या लोगों पर हमले करने से पहले उन्हें ‘मुस्लिम कुत्ते’ कहा गया

संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च न्यायालय (ICJ) में गाम्बिया की उस याचिका पर गुरूवार को भी सुनवाई जारी रही, जिसमें म्याँमार पर, रोहिंग्या समुदाय के ख़िलाफ़ जनसंहार करने का आरोप लगाया गया है. इस मुक़दमे की सुनवाई के दौरान आरोप लगाया गया है कि म्याँमार के सैन्य अधिकारियों ने, रोहिंग्या अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को “मुस्लिम कुत्ते” कहकर सम्बोधित किया और उन्हें “समाप्त कर देने” की बातें कहकर हिंसा के लिए उकसाया.

हाल ही में आए रोहिंग्या शरणार्थी, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं, म्यांमार से नौका से 5 घंटे की यात्रा के बाद बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में शमलापुर समुद्र तट पर किनारे चल रहे हैं।
© UNICEF/Patrick Brown

ICJ: 'म्याँमार के ख़िलाफ़ रोहिंग्या जनसंहार' मामले की सुनवाई शुरू

अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में, म्याँमार में रोहिंग्या लोगों के जनसंहार के आरोपों के मामले में, देश के ख़िलाफ़ मुक़दमे की ऐतिहासिक सुनवाई सोमवार को शुरू हुई है. यह मामला गाम्बिया ने म्याँमार के ख़िलाफ़ दायर किया है, जिसमें म्याँमार की सेना द्वारा, रोहिंग्या अल्पसंख्यक समुदाय के ख़िलाफ़ किए गए क्रूर व्यवहार में, जनसंहार कन्वेंशन का उल्लंघन किए जाने का आरोप लगाया गया है.

म्याँमार में जानलेवा हालात से बचने के लिए, रोहिंज्या लोग अन्य देशों को जाने की ख़ातिर, घातक समुद्री यात्राएँ करने को विवश हैं.
© UNHCR/Amanda Jufrian

अंडमान सागर में नाव दुर्घटना, 21 यात्रियों की मौत

यूएन एजेंसियों ने, मलेशिया और थाईलैंड के दरम्यान हाल में हुई एक नौका दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है. यह नाव म्याँमार से 70 लोगों को लेकर जा रही थी, जिनमें रोहिंग्या भी शामिल थे. इस दुर्घटना में कम से कम 21 लोगों के मारे जाने की ख़बरें हैं.

म्याँमार में 2017 में सैन्य अभियान के दौरान जान बचाने के लिये बड़ी संख्या में रोहिंज्या समुदाय के लोगों ने बांग्लादेश का रुख़ किया. (फ़ाइल)
© UNICEF/Patrick Brown

रोहिंग्या शरणार्थी संकट पर अन्तरराष्ट्रीय इच्छाशक्ति की परीक्षा

लगभग आठ साल पहले, 7 लाख 50 हज़ार से अधिक रोहिंग्या लोग, म्याँमार से पलायन करके, बांग्लादेश के शिविरों में पहुँचे थे. यह संकट आज भी जारी है. मंगलवार को न्यूयॉर्क में विश्व नेतासंयुक्त राष्ट्र अधिकारी और नागरिक समाज के प्रतिनिधि, एक उच्च-स्तरीय बैठक में, न केवल इस मानवीय आपातस्थिति परबल्कि इसे लम्बा खींचने वाले भू-राजनैतिक गतिरोध पर भी चर्चा करेंगे.

म्याँमार में अनेक वर्षों से गम्भीर संकट जारी है और भूकम्प ने भी हालात को बदतर बनाया है.
© IOM/Benjamin Suomela

UNHCR: म्याँमार के संकट के लिए मदद और धन बढ़ाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैंडी ने म्याँमार की तीन दिन की यात्रा करके, वहाँ निरन्तर जारी हिंसा और संघर्ष के गम्भीर नतीजों का जायज़ा लिया है, जिसके कारण लाखों लोग विस्थापित और बेघर हो गए हैं. उन्होंने साथ ही क्षेत्र में तमाम शरणार्थियों की मदद के लिए वित्तीय सहायता की अपील भी जारी की है.

म्याँमार से जान बचाकर भागे लाखों रोहिंज्या शरणार्थी, बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में रह रहे हैं, जिन्हें यूएन एजेंसियाँ मदद मुहैया करा रही हैं.
© WFP/Sayed Asif Mahmud

थाईलैंड में शरणार्थियों को मिला रोज़गार हासिल करने का अधिकार

म्याँमार से थाईलैंड पहुँचे और लम्बे समय से वहाँ रह रहे शरणार्थियों को, अब वहाँ रोज़गार व आमदनी वाला काम करने का क़ानूनी अधिकार मिल गया है. थाईलैंड की राजशाही सरकार के ऐतिहासिक फै़सले के तहत ये अधिकार दिया गया है. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है.

बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में रोहिंज्या शरणार्थी शिविर में एक महिला अपने बच्चे के साथ यूनीसेफ़ द्वारा संचालित पोषण केन्द्र में पहुँची है.
© UNICEF/Jimmy Kruglinski

म्याँमार: रोहिंग्या समुदाय के जबरन पलायन के आठ वर्ष, नए सिरे से एकजुटता की अपील

वर्ष 2017 में, म्याँमार के राख़ीन प्रान्त में सैन्य बलों की भीषण कार्रवाई से बचने के लिए सामूहिक विस्थापन का शिकार हुए रोहिंग्या समुदाय ने सुरक्षा की तलाश में बांग्लादेश का रुख़ किया था. संयुक्त राष्ट्र ने इस त्रासदी के आठ वर्ष होने के अवसर पर ध्यान दिलाया है कि मुख्यत: मुस्लिम समुदाय की म्याँमार में गरिमामय, स्वैच्छिक वापसी सुनिश्चित करने के लिए अन्तरराष्ट्रीय एकजुटता दर्शाई जानी होगी.

म्याँमार में धान के एक खेत में बिछाई गई बारूदी सुरंग में अपना पाँव गँवाने वाला एक 15 वर्षीय बच्चा.
© UNICEF/Minzayar Oo

म्याँमार: सेना द्वारा संचालित हिरासत केन्द्रों में सुनियोजित यातनाएँ

म्याँमार के लिए संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र जाँच तंत्र (IIMM) ने अपनी नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट कहा है कि देश की सेना द्वारा संचालित हिरासत केन्द्रों में लोगों को व्यवस्थित और सुनियोजित यातनाएँ दी जा रही हैं, जिनमें यौन हिंसा, लोगों को पीटा जाना, बिजली के झटके दिया जाना, गला घोंटने और सामूहिक बलात्कार शामिल हैं और यह चलन पूरे देश में गहरा होते देखा गया है.

म्याँमार में जानलेवा हालात से बचने के लिए, रोहिंज्या लोग अन्य देशों को जाने की ख़ातिर, घातक समुद्री यात्राएँ करने को विवश हैं.
© UNHCR/Amanda Jufrian

म्याँमार में फिर भड़की हिंसा के बीच, अन्य डेढ़ लाख रोहिंग्या लोग बांग्लादेश पहुँचे

म्याँमार के राख़ीन प्रान्त में बढ़ते टकराव और चुनिन्दा लोगों को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा ने, पिछले 18 महीनों में अन्य लगभग एक लाख 50 हज़ार रोहिंग्या शरणार्थियों को बांग्लादेश भागने पर मजबूर कर दिया है. यह पड़ोसी देश में हाल के वर्षों में सबसे बड़ा पलायन है.

मार्च 2025 में आए भूकम्प के बाद म्याँमार के मैंडाले क्षेत्र में लोग मलबा हटाते हुए.
© UNOCHA/Myaa Aung Thein Kyaw

म्याँमार में लगातार आने वाले भूकम्प के झटकों से लोगों में दहशत

म्याँमार में लगातार आ रहे भूकम्प के झटकों से लोगों में डर बना हुआ है, जहाँ 28 मार्च को आए 7.7 तीव्रता के भूकम्प के एक महीने बाद भी, लाखों लोग मानवीय सहायता पाने के लिए बुरी तरह जूझ रहे हैं. इस भूकम्प में 3 हज़ार 800 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी और 5 हज़ार 100 से अधिक लोग घायल हुए थे.