वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

रोहिंग्या शरणार्थी संकट

Rohingya refugees arrive by makeshift raft from Myanmar to Noya Para, Bangladesh.
© UNICEF/Mackenzie Knowles-Coursin

रोहिंग्या शरणार्थियों को नहीं भुला देने का आग्रह, धन कटौती से मदद पर संकट

म्याँमार में रहने वाले रोहिंग्या लोगों को वहाँ हिंसक उत्पीड़न और जानलेवा दमन का सामना करने के बाद बड़े पैमाने पर बांग्लादेश में शरण लेने के लिए पहुँचे हुए नौ वर्ष होने वाले हैं. इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी UNHCR ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से, बांग्लादेश में रह रहे 12 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों को बेसहारा नहीं छोड़ देने का आग्रह किया है.

एक रोहिंग्या शरणार्थी महिला और बच्चा बांग्लादेश के कोक्स बाजार में एक शरणार्थी शिविर में एक बाजार के सामने खड़े हैं।
© UNICEF/Ilvy Njiokiktjien

बांग्लादेश में रोहिंग्या व मेज़बान समुदायों के लिए $71 करोड़ की अपील

संयुक्त राष्ट्र और उसके साझीदार संगठनों ने बांग्लादेश सरकार के साथ मिलकर, कॉक्सेस बाज़ार और भाषण चार में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों व स्थानीय मेज़बान समुदायों की अत्यन्त महत्वपूर्ण ज़रूरतों को पूरा करने के लिए लगभग 71 करोड़ डॉलर की सहायता अपील जारी की है. 

सिटवे, म्यांमार में एक शिविर में एक गर्भवती रोहिंग्या महिला अपने परिवार के लिए खाना बना रही है।
© WFP/Htet Oo Linn

मध्य पूर्व संकट से म्याँमार में ‘भूख’ गहराई, योरोपीय संघ ने बढ़ाया मदद का हाथ

मध्य पूर्व संकट के कारण खाद्य पदार्थों और ईंधन की क़ीमतों में आई भारी तेज़ी ने म्याँमार में भी परिवारों पर नया दबाव बना दिया है, और लाखों लोग अपनी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. योरोपीय संघ ने इन हालात के मद्देनज़र औरदेश भर में गहराती भुखमरी से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) को, 80 लाख योरो की आपदा राहत राशि देने की घोषणा की है.

एक माँ और उसके तीन छोटे बच्चे एक साथ बैठे हैं और कैमरे की ओर देख रहे हैं।
© UNOCHA/Siegfried Modola

म्याँमार में हिंसा और दमन का चक्र जारी, मगर जबावदेही अब भी दूर

म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर स्वतंत्र विशेषज्ञ टॉम ऐंड्रयूज़ ने, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से म्याँमार में जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयासों को तेज़ करने की अपील की है और कहा है कि दशकों से जारी दंडमुक्ति (impunity) ने देश को मानवाधिकार संकट की भयावह स्थिति में धकेल दिया है.

बांग्लादेश से उत्तर अचेह, इंडोनेशिया के उली माडन में आ रहे रोहिंग्या शरणार्थी एक नाव से अपना सामान उतार रहे हैं।
© UNHCR/Amanda Jufrian

2025 में समुद्र बना रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए मौत का जाल, रिकॉर्ड संख्या में मौतें

संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने बताया है कि वर्ष 2025 में अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में, लगभग 900 रोहिंग्या शरणार्थी, मृत या लापता पाए गए. रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए यह वर्ष, दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया में अब तक का सबसे जानलेवा साल साबित हुआ है.

बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में एक शरणार्थी शिविर के जले हुए अवशेषों के बीच एक बच्चा बाल्टी से खाना खा रहा है, जबकि पास ही एक महिला छाता पकड़े हुए है।
© UNICEF/Maria Spiridonova

म्याँमार के रोहिंग्या लोगों पर हमले करने से पहले उन्हें ‘मुस्लिम कुत्ते’ कहा गया

संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च न्यायालय (ICJ) में गाम्बिया की उस याचिका पर गुरूवार को भी सुनवाई जारी रही, जिसमें म्याँमार पर, रोहिंग्या समुदाय के ख़िलाफ़ जनसंहार करने का आरोप लगाया गया है. इस मुक़दमे की सुनवाई के दौरान आरोप लगाया गया है कि म्याँमार के सैन्य अधिकारियों ने, रोहिंग्या अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को “मुस्लिम कुत्ते” कहकर सम्बोधित किया और उन्हें “समाप्त कर देने” की बातें कहकर हिंसा के लिए उकसाया.

हाल ही में आए रोहिंग्या शरणार्थी, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं, म्यांमार से नौका से 5 घंटे की यात्रा के बाद बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में शमलापुर समुद्र तट पर किनारे चल रहे हैं।
© UNICEF/Patrick Brown

ICJ: 'म्याँमार के ख़िलाफ़ रोहिंग्या जनसंहार' मामले की सुनवाई शुरू

अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में, म्याँमार में रोहिंग्या लोगों के जनसंहार के आरोपों के मामले में, देश के ख़िलाफ़ मुक़दमे की ऐतिहासिक सुनवाई सोमवार को शुरू हुई है. यह मामला गाम्बिया ने म्याँमार के ख़िलाफ़ दायर किया है, जिसमें म्याँमार की सेना द्वारा, रोहिंग्या अल्पसंख्यक समुदाय के ख़िलाफ़ किए गए क्रूर व्यवहार में, जनसंहार कन्वेंशन का उल्लंघन किए जाने का आरोप लगाया गया है.

बांग्लादेश से उत्तर अचेह, इंडोनेशिया के उली माडन में आ रहे रोहिंग्या शरणार्थी एक नाव से अपना सामान उतार रहे हैं।
© UNHCR/Amanda Jufrian

अंडमान सागर में नाव दुर्घटना, 21 यात्रियों की मौत

यूएन एजेंसियों ने, मलेशिया और थाईलैंड के दरम्यान हाल में हुई एक नौका दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है. यह नाव म्याँमार से 70 लोगों को लेकर जा रही थी, जिनमें रोहिंग्या भी शामिल थे. इस दुर्घटना में कम से कम 21 लोगों के मारे जाने की ख़बरें हैं.

7 सितंबर 2017 को, नव आगमन रोहिंग्या शरणार्थी बंगाल की खाड़ी पर म्यांमार से बांग्लादेश के चटगांव डिवीजन के कॉक्स बाजार जिले में टेकनाफ के लिए नाव से यात्रा करने के बाद किनारे चलते हैं। कई महिलाएं और बच्चे अपने सामान ले जा रहे हैं।
© UNICEF/Patrick Brown

रोहिंग्या शरणार्थी संकट पर अन्तरराष्ट्रीय इच्छाशक्ति की परीक्षा

लगभग आठ साल पहले, 7 लाख 50 हज़ार से अधिक रोहिंग्या लोग, म्याँमार से पलायन करके, बांग्लादेश के शिविरों में पहुँचे थे. यह संकट आज भी जारी है. मंगलवार को न्यूयॉर्क में विश्व नेतासंयुक्त राष्ट्र अधिकारी और नागरिक समाज के प्रतिनिधि, एक उच्च-स्तरीय बैठक में, न केवल इस मानवीय आपातस्थिति परबल्कि इसे लम्बा खींचने वाले भू-राजनैतिक गतिरोध पर भी चर्चा करेंगे.

थाईलैंड के रानोंग में एक बुजुर्ग महिला और एक युवती फर्श पर बैठी एक बड़ी चटाई पर झींगा छील रही हैं।
© IOM/Benjamin Suomela

UNHCR: म्याँमार के संकट के लिए मदद और धन बढ़ाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैंडी ने म्याँमार की तीन दिन की यात्रा करके, वहाँ निरन्तर जारी हिंसा और संघर्ष के गम्भीर नतीजों का जायज़ा लिया है, जिसके कारण लाखों लोग विस्थापित और बेघर हो गए हैं. उन्होंने साथ ही क्षेत्र में तमाम शरणार्थियों की मदद के लिए वित्तीय सहायता की अपील भी जारी की है.