वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

प्रवासी और शरणार्थी

संघर्ष और आग के बाद सूडान के एक शिविर में एक विस्थापित महिला राख और जलाए गए सामानों के बीच जा रही है, जो मानवीय संकट को उजागर करती है।
© UNICEF/Mohammed Jamal

सूडान: अल फ़शर में घातक हमलों के बीच तुरन्त युद्धविराम की अपील

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शुक्रवार को, हिंसक टकराव व घेराबन्दी से जूझ रहे सूडानी शहर अल फ़शर और उसके आस-पास के इलाक़ों में तुरन्त युद्धविराम लागू किए जाने की अपील की है, जहाँ पिछले एक साल से लाखों लोग फँसे हुए हैं.

म्याँमार से जान बचाकर भागे लाखों रोहिंज्या शरणार्थी, बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में रह रहे हैं, जिन्हें यूएन एजेंसियाँ मदद मुहैया करा रही हैं.
© WFP/Sayed Asif Mahmud

थाईलैंड में शरणार्थियों को मिला रोज़गार हासिल करने का अधिकार

म्याँमार से थाईलैंड पहुँचे और लम्बे समय से वहाँ रह रहे शरणार्थियों को, अब वहाँ रोज़गार व आमदनी वाला काम करने का क़ानूनी अधिकार मिल गया है. थाईलैंड की राजशाही सरकार के ऐतिहासिक फै़सले के तहत ये अधिकार दिया गया है. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है.

बांग्लादेश के कुटुपलोंग शरणार्थी शिविर में, आग लगने के बाद नुक़सान का जायज़ा लेते, आईओएम के सहायताकर्मी. पृष्ठभूमि में, आग से विस्थापित हुए शरणार्थी नज़र आ रहे हैं.
IOM Photo

युद्धग्रस्त क्षेत्रों में स्वास्थ्यकर्मी और सहायता कर्मी बन रहे हैं निशाना

ग़ाज़ा से लेकर सूडान तक, और यूक्रेन से लेकर हेती व डीआरसी तक, दुनिया भर के युद्ध अब केवल सैन्य मोर्चों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के लिए बनाई गई स्वास्थ्य व्यवस्थाएँ भी निशाने बन रही हैं. 

सूडान के ख़ारतूम में फेडल अस्पताल के बाहर तबाह वाहन.
© Avaaz/Giles Clarke

सूडान में युद्ध ने पलक झपकते राहतकर्मी से बनाया शरणार्थी, आपबीती

सूडान में जारी युद्ध ने लाखों ज़िन्दगियों को तहस-नहस कर दिया है. इन्हीं में से एक हैं ऐ़डम इब्राहिम, जो संयुक्त राष्ट्र की मानवीय संस्था OCHA के साथ काम कर रहे थे. वर्ष 2023 में जब प्रतिद्वंद्वी लड़ाका गुटों के बीच युद्ध भड़का, तो ऐ़डम को भी अपने परिवार के साथ शरणार्थी बनना पड़ा. 

संघर्ष और आग के बाद सूडान के एक शिविर में एक विस्थापित महिला राख और जलाए गए सामानों के बीच जा रही है, जो मानवीय संकट को उजागर करती है।
© UNICEF/Mohammed Jamal

सूडान: अल फ़शर में RSF का भीषण हमला, 57 नागरिकों की मौत

मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने, सूडान के उत्तरी दारफू़र प्रान्त की राजधानी अल फश़र पर, त्वरित समर्थन बल (RSF) के घातक हमले की निन्दा की है. इस हमले में लगभग 57 लोगों की मौत हो गई. यह शहर अप्रैल 2024 से RSF की घेराबन्दी में फँसा हुआ है, और गम्भीर मानवीय संकट का सामना कर रहा है. 

दक्षिण सूडान के जोंगलेई प्रान्त में ज़रूरतमन्द परिवार विमान से गिराए गए अनाज के पैकेट जुटा रहे हैं.
© WFP/Samantha Reinders

सूडान: युद्ध व हैज़ा महामारी की गहरी जकड़, जीवन के लिए जूझ रहे हैं लोग

सूडान में लाखों लोग हिंसा, हैज़ा महामारी और विस्फोटक ख़तरों के बीच अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों ने आगाह किया कि इस महामारी को रोकने के लिए तुरन्त मदद की आवश्यकता है, जबकि हथियारबन्द समूह, हिंसा से बचकर भाग रहे लोगों को लगातार आतंकित कर रहे हैं.

गम्भीर कुपोषण से पीड़ित, तीन वर्षीय शिम्बा, यूनीसेफ़ समर्थित पोर्ट सूडान बाल चिकित्सा अस्पताल में चिकित्सीय दूध पी रही है.
© UNICEF/Mira Nasser

सूडान: बच्चे हड्डी के ढाँचों में तब्दील, हालात बेहद ख़राब

सूडान के उत्तर दारफ़ूर के ज़मज़म शिविर में एक साल पहले, अकाल की घोषणा की गई थी. मगर, तब से अभी तक, हालात में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है. वहाँ न तो राहत सामग्री के ट्रक पहुँच पाए हैं, न ही नज़दीकी शहर अल-फ़शर की घेराबन्दी ख़त्म हुई है. दारफ़ूर में खाद्य पदार्थों की क़ीमतें देश के अन्य हिस्सों की तुलना में चार गुना ज़्यादा हैं.

सूडान के उत्तरी दारफ़ूर प्रान्त में कुछ महिलाएँ अपने बच्चों को पोषण ख़ुराक व जाँच-पड़ताल के लिए, एक पोषण केन्द्र पर.
© UNICEF/Mohammed Jamal

सूडान: उत्तर दारफ़ूर में फैला हैज़ा, 6.4 लाख बच्चों का जीवन ख़तरे में

यूनीसेफ़ ने आगाह किया कि सूडान के उत्तर दारफ़ूर प्रान्त में, भूख और विस्थापन से पहले ही कमज़ोर हो चुके हज़ारों बच्चों पर, अब जानलेवा बीमारी हैज़ा का ख़तरा भी मंडरा रहा है. इस गम्भीर स्थिति के बावजूद, युद्ध की वजह से, सम्पर्क से कटे इलाक़ों तक मानवीय सहायता नहीं पहुँच पा रही है.

ग़ाज़ा में भूखमरी के हालात.
© UNICEF/Mohammed Nateel

भूख को 'युद्ध का हथियार' नहीं बनने दिया जा सकता, एंतोनियो गुटेरेश

ग़ाज़ा में युद्ध की वजह से भुखमरी का संकट गहराता जा रहा है. इसी बीच संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने सोमवार को एक बार फिर आगाह किया कि इसराइल द्वारा 'एक सप्ताह के लिए सहायता बढ़ाने' का निर्णय, घातक कुपोषण के स्तर से निकलने के लिए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है.