महिला सरपंचों ने 'बदली अपने गांवों की तस्वीर'

3 अक्टूबर 2019

निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की हिस्सेदारी ज़मीनी स्तर पर कितना बदलाव ला सकती है, इसकी एक बानगी दिखाई दी न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में, जिसमें दो महिला सरपंचों ने बताया कि किस तरह वे ग्रामीण क्षेत्रों में ज़रूरतमंदों तक बुनियादी सुविधाएँ पहुंचा रही हैं.

भारत में पंचायती राज व्यवस्था निचले स्तर पर लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का एक ऐसा मॉडल है जो टिकाऊ विकास एजेंडा के महत्वाकांक्षी सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभा रहा है.

मध्य प्रदेश के बरखेड़ी अब्दुल्लाह गांव में सरपंच की ज़िम्मेदारी संभाल रही भक्ति शर्मा ने बताया कि उनके गांव में अब 100 फ़ीसदी बच्चे स्कूल जाते हैं, शौचालयों की संख्या 9 से बढ़कर 500 से ज़्यादा हो गई है और क़रीब आधी आबादी के पास पक्के घर हैं.

हिमाचल प्रदेश के एक गांव की सरपंच कला देवी के अनुसार शुरुआती मुश्किलों के बावजूद उन्हें रूढ़िवादिता से लड़ने में सफलता मिली है.

पंचायती राज व्यवस्था के तहत ऐसी ही 13 लाख से ज़्यादा महिला सरपंच अपने समुदायों को आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ा रही हैं.

सुनिए भक्ति शर्मा और कला देवी के साथ यूएन न्यूज़ के सचिन गौड़ की बातचीत.

अवधि
5'10"

 

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